रेलवे का बड़ा फैसला: टिकट कैंसिलेशन पर सख्ती, अब 8 घंटे की डेडलाइन, चूक गए तो रिफंड खत्म

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नई दिल्ली, प्रेस 15 न्यूज। कंफर्म टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब यात्रियों को ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट रद्द कराना अनिवार्य होगा, तभी रिफंड मिल सकेगा। यह बदलाव यात्रियों की सुविधा और टिकट सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

रेलवे द्वारा “52 सप्ताह में 52 सुधार” अभियान के तहत रिफंड नियमों में अहम संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, अब ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द कराने पर रिफंड नहीं मिलेगा, जिससे आखिरी समय में टिकट ब्लॉक कर उनकी कालाबाजारी करने वालों पर रोक लगेगी।

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संशोधित नियमों के मुताबिक, 72 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर: न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज काटकर अधिकतम रिफंड मिलेगा।

72 से 24 घंटे के बीच रद्द करने पर: कुल किराए का 25% काटा जाएगा।

24 से 8 घंटे के बीच रद्द करने पर: केवल 50% किराया ही वापस मिलेगा।

8 घंटे के भीतर रद्द करने पर: कोई रिफंड नहीं मिलेगा।

रेलवे ने यात्रियों को राहत देते हुए बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम भी आसान किए हैं। अब यात्री ट्रेन के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं, जबकि पहले यह सुविधा केवल रिजर्वेशन चार्ट बनने से पहले तक सीमित थी।

इसके अलावा, यदि किसी ट्रेन को रद्द कर दिया जाता है या वह अपने तय समय से 3 घंटे से अधिक देरी से चलती है, तो यात्री टीडीआर (Ticket Deposit Receipt) दाखिल कर पूरा रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।

लागू होने की तारीख:

यह नया नियम 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

रेलवे का यह कदम जहां एक ओर फर्जी बुकिंग और टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम लगाएगा, वहीं दूसरी ओर यात्रियों को समय पर योजना बनाकर यात्रा करने के लिए प्रेरित करेगा। नए नियमों से टिकट सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने और वास्तविक यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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