यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य के अपमान के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

खबर शेयर करें -

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्यों और बुजुर्ग संन्यासियों के साथ पुलिस द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार के मामले में उत्तर प्रदेश के बरेली से बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

वहीं डीएम के पास हार्ड कॉपी लेकर पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जिलाधिकारी आवास के बाहर निकलते ही उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी ने अपने आवास के अंदर उनको बंधक बनाने की कोशिश की।

Ad

इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर ‘ब्राह्मण विरोधी रवैया’ अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बुजुर्ग संन्यासियों के साथ पुलिस द्वारा किया गया कथित दुर्व्यवहार, विशेष रूप से उनकी शिखा (चोटी) का अपमान, अत्यंत निंदनीय और असहनीय है।

अग्निहोत्री ने 13 जनवरी को लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इन नियमों के तहत ‘समता समिति’ के माध्यम से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कर शोषण किए जाने की आशंका है, जिससे छात्रों का भविष्य और व्यक्तिगत जीवन संकट में पड़ सकता है।

उन्होंने ब्राह्मण समाज के सांसदों और विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे अपनी जाति और समाज के हितों पर चुप्पी साधे हुए हैं और कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो समाज के साथ अन्याय है।

इस्तीफा सौंपने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय ब्राह्मण समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लिया है। उन्होंने सभी ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से अपने पदों से इस्तीफा देकर जनता के साथ खड़े होने की अपील भी की है।

जैसे ही यह खबर सामने आई, ब्राह्मण सभा सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने खुलकर उनका समर्थन किया। विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘UGC हटाओ, देश बचाओ’ और ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारे लगाए गए।

ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा। उनका आरोप है कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है, जबकि समाज के जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं।

सभा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो इस्तीफों की ऐसी श्रृंखला शुरू होगी जिसे संभाल पाना मुश्किल होगा। उन्होंने अपने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका समाज मंगल पांडे और चंद्रशेखर आज़ाद की परंपरा से आता है और सरकार का यह कदम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0

संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

सम्बंधित खबरें