सुप्रीम कोर्ट ने विवादित UGC के नियमों पर लगाई रोक

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नई दिल्ली, प्रेस 15 न्यूज। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित UGC के नियमों पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि ये प्रावधान पहली नजर में अस्पष्ट हैं और इनका दुरुपयोग किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नए UGC नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने केंद्र को नियमों को फिर से बनाने का निर्देश दिया है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है।

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याचिकाओं में दलील दी गई कि UGC के नए नियम राज्यों के अधिकारों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता (Autonomy) में हस्तक्षेप करते हैं। खासकर नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक निर्णयों को लेकर चिंता जताई गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है, ऐसे में केवल UGC द्वारा एकतरफा नियम लागू करना संविधान की भावना के विरुद्ध है।

एडवोकेट विनीत जिंदल ने नियमों की धारा 3(c) के तहत एक याचिका दायर की थी, जो जाति-आधारित भेदभाव को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव के रूप में परिभाषित करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक UGC के नए नियमों को लागू नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC से इस मामले में जवाब भी मांगा है।

इस फैसले से जहां राज्यों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी राहत मिली है, वहीं छात्रों और शिक्षकों में भी उम्मीद जगी है कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

विवादित यूजीसी गाइडलाइन को भी जानिए

13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक नया नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” (समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026) लागू किया था। यह नियम भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर लागू किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना है।

इन विनियमों में जाति-आधारित भेदभाव को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विरुद्ध किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है। इससे OBC को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिलती है और पिछले मसौदा ढाँचे में मौजूद बड़ी कमी को सुधारा गया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में लागू किया गया नया कानून/नियमावली भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता (Equity), समावेशन (Inclusion) और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। इसे मुख्य रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र, दिव्यांगता अथवा किसी भी अन्य आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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