खबर विशेष: जहां जीभ बताती है वंश की पहचान, मां पूर्णागिरि के वरदान पर टिकी है गांव की आस्था

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लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। क्या किसी गांव की पहचान लोगों की जीभ से हो सकती है? लोहाघाट क्षेत्र के खूना बोरा गांव में ऐसा ही है। यहां बोरा वंश के हर स्त्री-पुरुष की जीभ चपटी है, और ग्रामीण इसे मां पूर्णागिरि का आशीर्वाद मानकर गर्व से दिखाते हैं।

इसके पीछे सदियों पुरानी आस्था की कथा है। कहा जाता है कि राणाओं के लगातार अत्याचार से त्रस्त ग्रामीणों के सामने जब वंश बचाने का संकट खड़ा हुआ, तो गांव के एक बुजुर्ग रक्षा की प्रार्थना लेकर पूर्णागिरि दरबार पहुंचे।

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भेंट चढ़ाने को कुछ न होने पर उन्होंने अपनी जीभ काटकर मां को अर्पित कर दी। इस समर्पण से प्रसन्न मां स्वयं प्रकट हुईं और भक्त के साथ गांव चली आईं। मानेश्वर के निकट जिस पहाड़ी पर उन्होंने वास किया, वहां से हिमालय की मनोहारी छटा दिखाई देती है।

मां ने वरदान दिया कि अब भक्तों को उनकी पूजा के लिए पूर्णागिरि धाम नहीं जाना पड़ेगा; मानेश्वर धाम में पूजा के बाद यहां आराधना करने पर वही पुण्य मिलेगा। श्रद्धा की यह गाथा अमर रहे, इसके लिए बोरा वंश की जीभ चपटी होने का आशीर्वाद भी दिया। तब से ग्रामीण इसी स्थान पर मां की उपासना करते हैं, जहां अब भव्य मंदिर बन चुका है।

हर वर्ष शरद पूर्णिमा पर लगने वाले विशाल मेले में देश-प्रदेश में बसे बोरा परिवार भी अपनी इष्ट देवी के दर्शन को लौटते हैं। बुजुर्ग हयात सिंह, हरी सिंह और बहादुर सिंह कहते हैं कि मां के आगमन के बाद से गांव में सुख-समृद्धि बनी हुई है।

युवा नवीन बोरा, कैलाश बोरा और भइयू बोरा पूर्वजों की इस विरासत को अपना गौरव मानते हैं। युवाओं की पहल पर कई वर्षों से यहां तीन दिवसीय मां पूर्णागिरि महोत्सव आयोजित हो रहा है, जिसमें भारी भीड़ उमड़ती है।

मानेश्वर: जहां अर्जुन ने उतारा मानसरोवर का जल

मां पूर्णागिरि के शिखर के समीप स्थित मानेश्वर धाम का पीठाधीश्वर धर्मराज पुरी जी महाराज के आगमन के बाद कायाकल्प हुआ है। वे बताते हैं कि वनवास काल में पांडव यहां रुके थे। पिता के श्राद्ध के लिए मानसरोवर जाना था, पर खराब मौसम ने रास्ता रोक दिया। युधिष्ठिर को चिंतित देख अर्जुन ने मानसरोवर के जल का आवाहन कर तीर चलाया और यहां जलधारा फूट पड़ी। यह धारा भीषण गर्मी में भी नहीं सूखती। मान्यता है कि इसके जल से अभिषेक करना मानसरोवर स्नान के समान पुण्यदायी है।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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