(चिंतन) कहीं देर न हो जाए… खतरा दरवाजा खटखटाकर नहीं आता

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आज का समय माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों की सुरक्षा बन गया है। आए दिन कहीं न कहीं किसी बच्चे के लापता होने, बहला-फुसलाकर ले जाने या अपहरण की खबर सामने आ जाती है।

ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ती भीड़ और डिजिटल दौर ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। ऐसे में केवल पुलिस या प्रशासन को दोष देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। सबसे पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिवार की है।

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अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चों को घर के बाहर, पार्क में या सड़क पर बिना निगरानी के खेलने के लिए छोड़ दिया जाता है। कई बार माता-पिता मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और बच्चे कुछ ही मिनटों में आंखों से ओझल हो जाते हैं। यही कुछ मिनट किसी अनहोनी की वजह बन सकते हैं। इसलिए बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें। यदि बच्चा बाहर खेल रहा है, तो किसी बड़े की निगरानी हमेशा होनी चाहिए।

बच्चों को केवल पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, उन्हें सुरक्षा के संस्कार देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्हें सिखाएं कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ कहीं न जाएं, किसी से चॉकलेट, खिलौना या कोई लालच स्वीकार न करें। यदि कोई जबरदस्ती करे तो जोर से चिल्लाएं, आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित करें और तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर भागें। बच्चों को माता-पिता का मोबाइल नंबर, घर का पता और आपातकालीन सहायता नंबर भी याद होना चाहिए।

तकनीक का सही उपयोग भी सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन सकता है। बड़े बच्चों के लिए लोकेशन शेयरिंग, स्मार्ट वॉच या जीपीएस ट्रैकर जैसे साधनों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही बच्चों की हाल की तस्वीर हमेशा सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत साझा की जा सके।

समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी है। यदि किसी बच्चे को संदिग्ध परिस्थिति में देखें या कोई बच्चा रोता-बिलखता दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें। सतर्क नागरिक कई बार किसी परिवार की दुनिया उजड़ने से बचा सकते हैं।

बच्चे केवल अपने माता-पिता की नहीं, पूरे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि परिवार, समाज, विद्यालय और प्रशासन सभी की साझा जिम्मेदारी है।

यदि हम थोड़ी-सी सावधानी, जागरूकता और जिम्मेदारी को अपने व्यवहार का हिस्सा बना लें, तो अनेक मासूम बच्चों को अनहोनी का शिकार होने से बचाया जा सकता है। याद रखिए, बच्चों की सुरक्षा किस्मत के भरोसे नहीं, हमारी सतर्कता से सुनिश्चित होती है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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