
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कुछ यात्राएं केवल पैरों से नहीं, बल्कि आस्था, करुणा और सेवा की भावना से पूरी होती हैं। हल्द्वानी के आदर्शनगर निवासी शिक्षाविद, पर्यावरणप्रेमी, समाजसेवी एवं Jeet IAS संस्थान में युवाओं का मार्गदर्शन करने वाली डॉ. शीला अधिकारी आज प्रातः पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुईं। उनके लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, मानव सेवा और प्रकृति के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने का अवसर है।
यात्रा में रवाना होने से पूर्व परिवार के लोगों ने उन्हें तिलक लगाया और देवी स्वरूप आरती की। इस दौरान उनकी बड़ी बहन शिक्षिका डॉ. रेखा मिश्रा भी मौजूद रहीं।
डॉ. शीला अधिकारी इससे पहले भी चार बार बाबा बर्फानी के पावन धाम के दर्शन कर चुकी हैं। उनका कहना है कि अमरनाथ यात्रा हर बार मुझे जीवन का नया अर्थ सिखाती है। यहां पहुंचकर अहंकार समाप्त हो जाता है और इंसान को एहसास होता है कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है।

यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए वह कहती हैं कि अमरनाथ यात्रा में सबसे अधिक जो दृश्य उनके मन को छूता है, वह भारतीय सेना का समर्पण है। हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना हर मौसम, हर कठिन परिस्थिति में अपने प्राणों की परवाह किए बिना सेवा करती है। जब भी मैं उन्हें देखती हूं तो मन गर्व और कृतज्ञता से भर जाता है। उनकी सेवा वास्तव में राष्ट्रभक्ति का सबसे सुंदर स्वरूप है।
डॉ. शीला अधिकारी बताती हैं कि यात्रा मार्ग पर देश के अलग-अलग राज्यों से आए समाजसेवियों द्वारा लगाए गए निःस्वार्थ भंडारे उन्हें हमेशा भावुक कर देते हैं। वहां कोई किसी का परिचित नहीं होता, फिर भी हर व्यक्ति दूसरे की सेवा में लगा रहता है। भूखे को भोजन, थके हुए को चाय और जरूरतमंद को सहारा… यही भारत की असली पहचान है।
उनके अनुसार अमरनाथ यात्रा केवल भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है। यह यात्रा हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा सुख दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में है। बाबा बर्फानी के दरबार में पहुंचकर मैं कभी अपने लिए कुछ नहीं मांगती। मेरी प्रार्थना होती है कि हर व्यक्ति के दिल में इंसानियत जीवित रहे, प्रकृति सुरक्षित रहे और कोई भी बेजुबान जीव पीड़ा में न रहे।
डॉ. शीला अधिकारी इससे पहले चारधाम यात्रा, माता वैष्णो देवी, वृंदावन सहित देशभर के अनेक शिवालयों और धार्मिक स्थलों की यात्रा भी कर चुकी हैं। उनका मानना है कि हर तीर्थ हमें प्रेम, सेवा, सहिष्णुता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो यही सबसे बड़ी पूजा होगी।
युवाओं को प्रेरित करने वाली डॉ. शीला अधिकारी का कहना है कि सफलता केवल बड़े पद या उपलब्धियां हासिल करने से नहीं मिलती, बल्कि तब मिलती है जब आपकी शिक्षा समाज, पर्यावरण और मानवता के काम आए।
डॉ. शीला अधिकारी की यह यात्रा केवल बाबा बर्फानी के दर्शन की यात्रा नहीं, बल्कि उस विचार की यात्रा है, जहां शिव भक्ति के साथ इंसानियत, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और बेजुबान जीवों के प्रति करुणा एक साथ चलती है। शायद यही कारण है कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें सिर्फ एक शिक्षाविद नहीं, बल्कि संवेदनशील और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में याद रखता है।









