‘मां उज्यालु करि दे’… एक प्रार्थना, हजारों भावनाएं ! डॉ. राकेश रयाल के सुरों में मां की वंदना

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हल्द्वानी/देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, गढ़वाली भाषा और मां भगवती के प्रति अटूट आस्था का सुंदर संगम लेकर आए हैं प्रो. राकेश चन्द्र रयाल (मनरागी)। उनके स्वर में सजे गढ़वाली भजन ‘मां उज्यालु करि दे’ में मां भगवती की वंदना के साथ जीवन की कठिन परिस्थितियों में उम्मीद, धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा भी समाहित है। इस भजन की रचना, धुन और स्वर तीनों डॉ. राकेश रयाल ने स्वयं दिए हैं।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी के दायित्वों का निर्वहन कर रहे डॉ. रयाल की पहचान केवल अकादमिक और मीडिया जगत तक सीमित नहीं है। वह एक प्रतिभाशाली गायक भी हैं और उत्तराखंड की लोक संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव है।

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इससे पहले भी उनके कंठ से कई सुंदर गीत और स्वर श्रोताओं तक पहुंच चुके हैं। ‘मां उज्यालु करि दे’ उनकी इसी रचनात्मक यात्रा की एक और भक्तिमय प्रस्तुति है, जिसमें स्थानीय भाषा की आत्मीयता और भक्ति की गहराई महसूस की जा सकती है।

कठिन समय में आस्था और सत्य का संदेश

डॉ. रयाल के अनुसार, जीवन में कई बार ऐसे कठिन दौर आते हैं, जब परिस्थितियां विपरीत हो जाती हैं, अपनों से भी उम्मीद टूटने लगती है और इंसान को आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता। ऐसे समय में ईश्वर के प्रति आस्था मनुष्य को मानसिक संबल देने के साथ धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

मां भगवती को समर्पित इस भजन के पीछे भी यही भाव है कि मनुष्य कठिनाइयों के बीच अपनी आस्था बनाए रखे, सही और गलत के बीच अंतर समझे तथा सत्य के मार्ग पर चलते हुए चुनौतियों का सामना करे। डॉ. रयाल का मानना है कि प्रार्थना केवल मनोकामनाएं पूरी होने की अपेक्षा नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की शक्ति पाने का माध्यम भी है।

द्वेष नहीं, सद्भाव और अच्छे कर्मों का संदेश

डॉ. रयाल अपने भाव व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जीवन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना चाहिए, किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए और न ही किसी के बुरे समय का कारण बनना चाहिए। समय और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन व्यक्ति के कर्म और उसका अंतःकरण हमेशा उसके साथ रहते हैं। इसलिए मनुष्य को सत्य का साथ देना चाहिए और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते रहना चाहिए।

उनकी इस प्रस्तुति में मां भगवती से केवल सुख-समृद्धि की कामना नहीं, बल्कि सद्बुद्धि, कठिनाइयों से लड़ने का साहस और सत्य के रास्ते पर चलने की शक्ति मांगने का भाव भी है। यही इसे सामान्य भक्ति प्रस्तुति से आगे बढ़कर जीवन के मूल्यों से जोड़ता है।

मां भगवती के चरणों में समर्पित भजन

डॉ. रयाल ने इस भजन को मां भगवती के चरणों में समर्पित करते हुए कामना की है कि प्रत्येक परिवार पर मां की कृपा बनी रहे। जो संकट में हैं, उन्हें संबल मिले, जो निराश हैं, उनके जीवन में आशा का संचार हो और सत्य के मार्ग पर चलने वालों को दृढ़ रहने की शक्ति मिले।

‘मां उज्यालु करि दे’ गढ़वाली भाषा में रची गई ऐसी भक्तिमय प्रस्तुति है, जो लोक संस्कृति के प्रति अनुराग के साथ श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करती है। डॉ. राकेश रयाल की यह दुर्गा वंदना मां भगवती के प्रति उनकी अटूट आस्था और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं से उनके जुड़ाव को भी अभिव्यक्त करती है। जय मां धारी देवी! जय मां भगवती!

यहां सुनें गढ़वाली भजन ‘मां उज्यालु करि दे’👇

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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