महाभारत आज भी जीवित है… हल्द्वानी से वरिष्ठ साहित्यकार शोभा लोहनी की कलम से

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महाभारत केवल एक ऐतिहासिक युद्ध नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर हर दिन चलने वाले सत्य और असत्य, विवेक और अहंकार, प्रेम और प्रतिशोध के संघर्ष का शाश्वत प्रतीक है।

बदलते समय में भले ही युद्ध के स्वरूप बदल गए हों, लेकिन रिश्तों में कटुता, छल, अहंकार और स्वार्थ के रूप में महाभारत आज भी हमारे समाज और जीवन में जीवंत दिखाई देती है। इन्हीं गहरे जीवन-सत्यों को सहज, प्रभावशाली और विचारोत्तेजक शब्दों में पिरोया है हल्द्वानी के पीलीकोठी निवासी वरिष्ठ साहित्यकार शोभा लोहनी ने अपनी कविता “महाभारत आज भी जीवित है” में।

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यह कविता पाठकों को न केवल आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है, बल्कि अपने भीतर के कुरुक्षेत्र को जीतने का संदेश भी देती है।

महाभारत आज भी जीवित है…

युद्ध के लिए शस्त्र हों, ये जरूरी नहीं,

शब्दों के बाणों से कई युद्ध लड़े जाते हैं।

ऐसा ही एक युद्ध है, जो सीमित नहीं इतिहास तक,

महाभारत है नाम उसका, जनजीवन में दिखता आज तक

तब द्रौपदी के व्यंग्य बाण सुन दुर्योधन आहत हुआ,

प्रतिशोध ज्वाला में जल, युद्ध में तत्पर हुआ।

आज भी कटु वचनों की चिंगारी

कई रिश्तों को राख है कर जाती।

अहंकार में आज भी दुर्योधन दिख जाता है,

मीठे शब्दों में विष घोल-घोल कोई शकुनी मुस्काता है।

बिना शस्त्र चलाए ही वह

अपनों को अपनों से लड़वाता है।

भाइयों के बीच महाभारत आज भी है हो रहा,

आज भी दुशासन द्रौपदी का चीर हरण कर रहा।

पुत्रमोह से ग्रसित धृतराष्ट्र भी मिल जाते हैं,

मोह में आकंठ डूबे न्याय को ठुकराते हैं।

अफवाह की छोटी चिंगारी

पूरे देश को जला देती,

तब भय अशांति के साये में पड़

मानवता रोती रहती।

अब गदा नहीं, गांडीव नहीं,

न रणभूमि में शंखनाद है,

पर छल, कपट, बेमानी के

अस्त्रों का प्रिय लगता साथ है।

असली कुरुक्षेत्र बाहर नहीं,

मन के भीतर बसता है,

मन के भीतर हरदम

एक युद्ध चलता रहता है।

पर आज भी कई कृष्ण यहां मिल जाएंगे,

जो शस्त्र नहीं,

शब्दों के बाणों से

इस युद्ध से पार लगाएंगे।

जिम्मेदारी हम सब की,

उस कृष्ण को पहचानें,

हाथ पकड़कर उनका

जग का उत्थान करें।

और अपने मन में छिपी

बुराइयों पर विजय प्राप्त करें।

महाभारत केवल इतिहास नहीं,

हर युग का ये दर्पण है…

शोभा लोहनी ✍️

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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