चिंतन: दौड़ती जिन्दगी, छूटती सेहत

खबर शेयर करें -

कहा जाता है कि “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।” यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। विडंबना यह है कि आज का इंसान उसी सेहत को दांव पर लगाकर धन कमाने की अंधी दौड़ में शामिल हो गया है। जिस शरीर के सहारे वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है, उसी शरीर की उपेक्षा सबसे पहले करता है।

भागमभाग भरी जीवनशैली ने जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, लेकिन संतुलित नहीं। देर रात तक काम करना, अनियमित भोजन, जंक फूड, तनाव, पर्याप्त नींद का अभाव और शारीरिक गतिविधियों से दूरी ये सब धीरे-धीरे शरीर को बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही हैं।

Ad

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लोग पहले स्वास्थ्य खोकर पैसा कमाते हैं और फिर वही पैसा स्वास्थ्य वापस पाने में खर्च करते हैं। यह ऐसा सौदा है जिसमें अंततः नुकसान ही नुकसान है। धन, पद और प्रतिष्ठा का आनंद भी तभी लिया जा सकता है, जब शरीर स्वस्थ और मन शांत हो। यदि स्वास्थ्य ही साथ न दे, तो सारी उपलब्धियां फीकी पड़ जाती हैं।

वास्तविक सफलता वही है, जिसमें काम और स्वास्थ्य के बीच संतुलन हो। नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और परिवार के साथ बिताया गया समय कोई विलासिता नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की अनिवार्य जरूरतें हैं।

जीवन की दौड़ में आगे बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन इतनी तेज भी नहीं कि पीछे मुड़कर देखने पर अपना स्वास्थ्य ही खो चुका हो। आखिरकार, पैसा जीवन को सुविधाएं दे सकता है, लेकिन स्वस्थ शरीर और सुकून भरा मन नहीं खरीद सकता। इसलिए याद रखें, सेहत से बड़ा सुख और कोई नहीं।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
2
+1
0
+1
0
+1
0

Ad

संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

सम्बंधित खबरें