
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। देवीधुरा मां बाराही की डोला यात्रा के बाद लधियाघाटी के प्रमुख ग्रामीण कस्बे भिगराड़ा में ऐड़ी बालकृष्ण मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। क्षेत्र में वर्षभर आयोजित होने वाला यह प्रमुख मेला आस्था, संस्कृति और व्यापार का अनूठा संगम है। 3 सितंबर से शुरू होने वाले तीन दिवसीय मेले का मुख्य आयोजन 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन होगा।
मेले को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के पहुंचने की संभावनाओं को देखते हुए बाजार को सजाया जा रहा है। देवीधुरा से पहुंचे व्यापारियों के कारण भिगराड़ा का बाजार भी गुलजार हो उठा है। स्थानीय लोग लंबे समय से मेले को पांच दिन तक आयोजित करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन स्थान और संसाधनों की कमी के चलते फिलहाल यह आयोजन तीन दिन तक ही होता है।
बताया जाता है कि वर्ष 1980 में समाजसेवी घनश्याम भट्ट और तत्कालीन रेंजर बालकृष्ण ने क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए यहां मेले की शुरुआत का निर्णय लिया था। पहले ही वर्ष मेले में उमड़ी भीड़ ने आयोजकों की व्यवस्थाओं को चुनौती दे दी थी। इसके बाद मेले की अवधि बढ़ाई गई और तभी से तीन दिवसीय आयोजन की परंपरा चली आ रही है।
इस बार मेले की व्यवस्थाओं की कमान युवाओं और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संभाली है। रमेश भट्ट, चंद्रशेखर जोशी, कृष्णानंद भट्ट, दिनेश भट्ट, धर्मानंद भट्ट, कमल भट्ट, शिवदत्त भट्ट, दीपक शर्मा समेत कई लोग आयोजन को भव्य बनाने में जुटे हैं। मेला समिति के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी मुकेश महराना को दर्जा राज्यमंत्री का सम्मान प्राप्त होने से भी इस बार लोगों को मेले में बेहतर व्यवस्थाओं और नई रौनक की उम्मीद है।
मेले में लधियाघाटी के साथ ही नैनीताल जिले से लगे गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। बदलते दौर के बावजूद मेले ने अपनी लोक सांस्कृतिक पहचान को कायम रखा है। झोड़ा, चांचरी और न्योली जैसे पारंपरिक लोकगीत एवं लोकनृत्य मेले की खास पहचान हैं।
3 सितंबर को भगवान ऐड़ी देवता का रातभर जागरण होगा, जबकि जन्माष्टमी के दिन दो स्थानों से भगवान बालकृष्ण और ऐड़ी देवता की शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। क्षेत्रवासी मेले के उद्घाटन और मुख्य आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)









