

हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कुछ यात्राएं केवल एक तीर्थ तक पहुंचकर समाप्त नहीं होतीं, बल्कि लौटने के बाद भी लोगों के दिलों में श्रद्धा, प्रेरणा और अपनत्व की नई रोशनी जगा जाती हैं।
हल्द्वानी के आदर्श नगर निवासी समाजसेवी और शिक्षाविद डॉ. शीला अधिकारी जब पवित्र अमरनाथ यात्रा पूरी कर बुधवार शाम अपने आदर्शनगर स्थित घर लौटीं, तो उनका स्वागत किसी सामान्य यात्री की तरह नहीं, बल्कि शिवभक्ति और सेवा के भाव से लौटे एक श्रद्धालु के रूप में हुआ।
जैसे ही उनके सकुशल यात्रा से लौटने की सूचना मिली, उनके आवास पर शुभचिंतकों, पड़ोसियों और क्षेत्र की महिलाओं का तांता लग गया।
पारंपरिक कुमाऊँनी परिधान रंगवाली पिछोड़ा धारण किए पहुंची मातृशक्ति ने डॉ. शीला अधिकारी की आरती उतारी, तिलक लगाया और उन्हें शुभाशीष दिया। आत्मीय स्नेह और सम्मान से अभिभूत डॉ. शीला की आंखें भी नम हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में मातृशक्ति का यह अटूट प्यार मां जैसा है जो महादेव की कृपा से ही संभव हो सका है।
घर का वातावरण कुछ ही देर में भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया। महिलाओं ने “भूखे को अन्न, प्यासे को पानी… जय हो बाबा बर्फानी”, “हर-हर महादेव” और शिव भजनों का सामूहिक गायन किया। पूरा वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बाबा भोलेनाथ की कृपा स्वयं वहां उपस्थित होकर सभी को आशीर्वाद दे रही हो।
डॉ. शीला अधिकारी ने सभी श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों को बाबा बर्फानी धाम से लाया गया पावन प्रसाद और पवित्र जल भेंट किया। इसके बाद उन्होंने अमरनाथ यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह उनकी चौथी अमरनाथ यात्रा थी और हर बार की तरह इस बार भी बाबा बर्फानी के दरबार से उन्हें नई ऊर्जा, आत्मिक शांति और मानव सेवा की प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा में सबसे अधिक प्रभावित करने वाला दृश्य भारतीय सेना का समर्पण है। कठिन पर्वतीय परिस्थितियों, विपरीत मौसम और जोखिम भरे हालात में भी सेना के जवान जिस निष्ठा से लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा में जुटे रहते हैं, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे वीर जवानों के कारण ही श्रद्धालु निश्चिंत होकर बाबा बर्फानी के दर्शन कर पाते हैं।
डॉ. शीला अधिकारी ने यात्रा मार्ग पर देशभर से पहुंचे समाजसेवियों द्वारा लगाए गए निःस्वार्थ भंडारों की भी मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि वहां कोई किसी को जानता नहीं, फिर भी हर व्यक्ति दूसरे की सेवा में समर्पित दिखाई देता है। भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और थके हुए यात्री को सहारा देने की यह भावना भारत की सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि उनके लिए अमरनाथ यात्रा केवल भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा, प्रकृति संरक्षण और मानवता का संदेश लेकर लौटने की यात्रा है। उनकी कामना है कि बाबा बर्फानी हर वर्ष उन्हें अपने धाम बुलाएं और समाज के लिए अधिक से अधिक सेवा करने की शक्ति प्रदान करें।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. शीला अधिकारी के शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशीलता और निस्वार्थ समाजसेवा के कार्यों की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सफल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आस्था, सेवा और संवेदनाओं से भरी यह वापसी केवल एक तीर्थयात्री के घर लौटने की घटना नहीं थी, बल्कि इस बात का भी संदेश थी कि जब भक्ति के साथ मानवता जुड़ जाती है, तब श्रद्धा समाज को प्रेरणा में बदल देती है।









