देवीधुरा मां बाराही के धाम में ऑनलाइन पूजा शुरू, चर्चा में ट्रस्ट की नई पहल

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लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। विश्व प्रसिद्ध मां बाराही धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

श्री बाराही मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद अब देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी ऑनलाइन पूजा-अर्चना कराने लगे हैं। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विवाह, यज्ञ, जनेऊ, शिवपूजन सहित अन्य धार्मिक संस्कारों में विशेष सहायता की व्यवस्था भी शुरू की गई है।

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ट्रस्ट के अध्यक्ष, रेलवे कॉरिडोर के पूर्व प्रबंध महानिदेशक एवं वेद पुराणों के जानकार हीरा बल्लभ जोशी ने बताया कि गरीब परिवार यदि बाराहीधाम में विवाह या अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराना चाहते हैं तो उन्हें 10 लोगों तक के लिए नि:शुल्क आवास, पूजा सामग्री, योग्य पुरोहित और पुरोहित की दक्षिणा उपलब्ध कराई जाएगी। श्रद्धालुओं को केवल भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी, जिसके लिए मंदिर परिसर में भोजनशाला उपलब्ध कराई जाएगी।

मां बाराही ट्रस्ट के अध्यक्ष, रेलवे कॉरिडोर के पूर्व प्रबंध महानिदेशक एवं वेद पुराणों के जानकार हीरा बल्लभ जोशी। प्रेस 15 न्यूज 

उन्होंने बताया कि टकनागुरौ गांव के मूल निवासी एवं वर्तमान में मध्य प्रदेश में रह रहे डॉ. घनश्याम जोशी द्वारा यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक मधुर जी ने मां बाराही धाम की आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव दुनिया के सामने साझा किया।

इसके बाद देश-विदेश के श्रद्धालुओं का इस प्राचीन शक्तिपीठ की ओर आकर्षण तेजी से बढ़ा है और अब ऑनलाइन पूजा एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए लगातार अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ही नहीं, देश के विभिन्न राज्यों से लोग यहां विवाह, जनेऊ संस्कार, शिवपूजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर में ऐसे विद्वान पुजारी हों जो संस्कृत के वेद मंत्रों और ऋचाओं का शुद्ध उच्चारण कर सकें, क्योंकि इससे धार्मिक वातावरण और अधिक दिव्य एवं आध्यात्मिक बनता है।

हीरा बल्लभ जोशी ने बताया कि ट्रस्ट ने पुजारियों के लिए संस्कृत भाषा, वेद-मंत्रों और विधिवत पूजा-पाठ का ज्ञान अनिवार्य करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। साथ ही पुजारियों के लिए निर्धारित वेशभूषा भी अनिवार्य की जा रही है।

उन्होंने स्वीकार किया कि श्रद्धालुओं की ओर से लगातार ऐसे सुझाव मिल रहे हैं और नई पीढ़ी को संस्कृत एवं वैदिक परंपराओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाराहीधाम उत्तर भारत का एक ऐसा दुर्लभ शक्तिपीठ है, जहां अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी ऑनलाइन पूजा कराने के अनुरोध मिलने लगे हैं।

दान व्यवस्था होगी पूरी तरह पारदर्शी

बाराही मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर में चढ़ावे की धनराशि के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था। ट्रस्ट के अनुसार दानपात्र खोले जाने के समय संबंधित बैंक अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

चढ़ावे की गणना सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की जाएगी तथा प्रत्येक पर्व पर ट्रस्ट द्वारा नामित सदस्यों को बारी-बारी से बदला जाएगा। गिनती के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को वहां मौजूद रहने की अनुमति नहीं होगी। इससे चढ़ावे की धनराशि के प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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