
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। बच्चों की शिक्षा के साथ उनके संस्कारों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। पुराणों के मर्मज्ञ एवं कथा वाचक प्रकाश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि परिवार में सदाचार और सम्मान का अभाव हो तो धन-संपत्ति भी सुख-शांति सुनिश्चित नहीं कर सकती।
उन्होंने माता-पिता की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संतान के जन्म पर परिवार अनेक सपने संजोता है, लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव में कुछ माता-पिता को अपने ही घर से दूर वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस परंपरा में माता-पिता को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है, वहां ऐसी स्थिति आत्मचिंतन का विषय है।
शास्त्री ने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि आचार-विचार और पारिवारिक संस्कारों में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को धार्मिक ग्रंथों की जानकारी देने के साथ उनके संदेशों का महत्व समझाने का आग्रह किया।
उन्होंने रामलीला को जीवन निर्माण की प्रेरणा बताया। कहा कि श्रीराम का पिता के वचनों के प्रति समर्पण, लक्ष्मण का भाई के प्रति प्रेम और शबरी के प्रति श्रीराम की आत्मीयता व्यवहार में अपनाने योग्य आदर्श हैं।
शास्त्री ने कहा कि परिवारों में प्रेम, कर्तव्य और सम्मान की भावना बनी रहे तो घर सुखद बन सकता है। इसके विपरीत संस्कारों के अभाव में संपन्न परिवार भी रोज के विवादों से घिर सकता है।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की रिपोर्ट ✍️)











