
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। चंपावत जिले का रायनगर चौड़ी गांव आज पूरे उत्तराखंड के लिए सामाजिक एकजुटता और भाईचारे की मिसाल बन चुका है।
विपत्ति के समय एक-दूसरे का सहारा बनने की अपनी अनूठी परंपरा को निभाते हुए गांव वासियों ने एक बेसहारा विधवा दुर्गी देवी की बेटी पूजा का विवाह पूरे विधि-विधान और सामूहिक सहभागिता के साथ संपन्न कराया।
शिक्षाविद नाथूराम राय, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक नरेश राय और सामाजिक कार्यकर्ता भैरव राय के आह्वान पर पूरे गांव ने बिना किसी तामझाम या शराब के प्रयोग के इस मांगलिक कार्य को ऐसे निभाया कि परिवार को पिता और भाई की कमी का अहसास तक नहीं होने दिया।
चंपावत जिले में रायनगर, चौड़ी ऐसा गांव है जहां गांव के लोगों पर किसी प्रकार की विपत्ति आने पर लोग पीड़ित परिवार का चाचा, चाची, ताऊ, ताई, धर्म माता-पिता, भाई बहन बन कर उसका दुख लील लेते हैं।
गांव की देवकी देवी उर्फ दुर्गी गांव की एक ऐसी अभागिन महिला है, जिसने पहले जवानी में अपने पति को खोया, जब बच्चों पर उसने जीवन की आस लगाई तो ईश्वर ने इकलौते बेटे भी छीन लिया जिससे उसके सामने जीवन में दिन में ही अंधेरा छा गया, लेकिन गांव के लोग अपने संस्कार व व्यवहार के कारण विभिन्न रिश्तो में उसके सामने खड़े हो गए।
हालांकि दुर्गी ने खोए अपने सुहाग एवं एकलोंते बेटे के वियोग को झेलना उसकी नियति में लिखा हुआ था। लेकिन गाव के लोगों ने उसके चारों ओर रिश्तों का चक्र बनाकर उसे जो साहस व सामर्थ दिलाया, उसे देखकर उसकी भविष्य की आस जगने लगी।
आज विजयादशमी के दिन दुर्गी की बेटी पूजा की शादी थी जिसकी पूरी व्यवस्था गांव के रिश्तों ने ऐसे निभाई की दुर्गी को पता ही नहीं चला कि कैसे बेटी का विवाह निपट गया। गांव के लोगों की ऐसी सामूहिक सहभागिता देखकर स्वयं बारातियौं के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।
सभी बाराती अपने साथ गांव की इस सामुदायिक मिसाल को दहेज के रूप में अपने साथ ले गए।यह ऐसा गांव है जहां उम्र के हिसाब से उनका सम्मान होता है। गांव के शिक्षाविद नाथूराम राय, राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे गए शिक्षक नरेश राय गांव के सामाजिक कार्यकर्ता भैरव राय के आवाहन पर समूचे गांव के लोग मुट्ठी की तरह बंध जाते हैं।
इस गांव में प्रवेश करते ही यहां की सामाजिक सद्भावना एक दूसरे के पूरक बनने एवं विपत्ति में मां-बाप की तरह साथ देने की लोगों की भावनाओं की महक आने लगती है जिसे देखकर अन्य गांवों के लोग भी प्रेरणा लेते आ रहे हैं।
यह उत्तराखंड का ऐसा गांव बन गया है जहां शादी विवाह हो एवं अन्य मांगलिक कार्यों में शराब की दुर्गंध महसूस नहीं होती है।
इस गांव में कई बार पुराण कथाओं का वाचन करते आ रहे पुराणों के मर्मज्ञ आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री का कहना है कि रायनगर चौड़ी वास्तव में उत्तराखंड का ऐसा मॉडल गांव है जहां लोगों के सोचने, समझने ,जीवन शैली अन्य लोगों से अलग है। गांव का भाईचारा ऐसा है कि गांव के किसी व्यक्ति की यहां सुख-दुख कोई भी कड़ी हो उसे व्यक्ति को महसूस ही नहीं होता है कि कब उसका काम निपट गया शास्त्री जी का कहना है कि जहां सद्बुद्धि होती है वहां ईश्वर अच्छे कार्यों व विचारों का स्वयं रास्ता बना देते हैं।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)











