पंजाब के बच्चे पढ़ रहे उत्तराखंड के इस महान वैज्ञानिक को, अपने ही प्रदेश में क्यों भुला दिया गया?

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड के महान लोक विज्ञानी स्व. चन्द्रशेखर लोहुमी के वैज्ञानिक और शैक्षणिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की मांग उठी है। उनकी 123वीं जयंती पर एमबीपीजी कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में उनके जीवन, संघर्ष और शोध कार्यों को उत्तराखंड के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

साथ ही नैनीताल अथवा अल्मोड़ा जिले के किसी उपयुक्त शैक्षणिक संस्थान का नाम उनके नाम पर रखने सहित चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर मुख्यमंत्री को प्रेषित करने का निर्णय लिया गया।

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एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के वनस्पति विज्ञान विभाग और ‘हिमालयन डायलॉग्स’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. नरेन्द्र सिंह बनकोटी ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध विज्ञान लेखक देवेन मेवाड़ी द्वारा स्व. लोहुमी पर तैयार वीडियो के माध्यम से हुई। वक्ताओं ने उनके वैज्ञानिक प्रयोगों, शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण में योगदान को याद करते हुए उन्हें उचित सम्मान देने की आवश्यकता जताई।

मक्के की गिल्ली की राख पर किया महत्वपूर्ण शोध

मुख्य वक्ता पंतनगर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर वीर सिंह ने स्व. लोहुमी के साथ बिताए संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि साधारण पृष्ठभूमि से होने के बावजूद लोहुमी की वैज्ञानिक सोच और दूरदर्शिता असाधारण थी।

उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग से वर्ष 1980 से 1984 के बीच मक्के की अनुपयोगी समझी जाने वाली गिल्ली (कोब) की राख पर शोध किया और उससे कीटनाशक एवं डिटर्जेंट बनाने की संभावनाएं प्रमाणित कीं।

पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाली लैंटाना (कुरी झाड़) को नियंत्रित करने वाले लैंटाना बग की खोज तथा बिना सिंचाई वाली भूमि में उगने वाले खरपतवार तिपतिया के नियंत्रण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

पंजाब बोर्ड की पुस्तक में पढ़ाए जा रहे लोहुमी के कार्य

भूगोल विभाग के प्रो. बीआर पंत ने बताया कि पंजाब सरकार के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12 की अंग्रेजी इलेक्टिव पुस्तक ‘डियर टू ऑल द म्यूजेज’ के ‘वारियर अगेंस्ट वीड’ अध्याय में विश्व की महान विभूतियों के साथ स्व. लोहुमी और लैंटाना बग से जुड़े उनके कार्यों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंजाब बोर्ड उत्तराखंड के इस लोक विज्ञानी के योगदान को पढ़ा रहा है, तो प्रदेश के विद्यार्थियों को उनके बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।

रटंत शिक्षा के विकल्प के रूप में विकसित की एकाकार वर्ग प्रणाली

स्व. लोहुमी के पुत्र हरिहर लोहुमी ने अपने पिता के जीवन से जुड़े कई पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने पारंपरिक रटंत शिक्षा के विकल्प के रूप में ‘एकाकार वर्ग प्रणाली’ विकसित की और स्कूली शिक्षा में लगातार प्रयोग किए।

वे स्थानीय बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे और स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनकी बड़ी बेटी ने मात्र 16 वर्ष की आयु में एमए (अर्थशास्त्र) की परीक्षा उत्तीर्ण कर शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र ने अल्मोड़ा के सतराली में तीन हजार से अधिक पौधे रोपकर ‘लोक वैज्ञानिक चन्द्रशेखर लोहुमी स्मृति वन’ की स्थापना की है।

पूर्व प्रोफेसर एवं वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ प्रो. पीसी पांडे ने पहाड़ में खरपतवार की विकराल होती समस्या पर चर्चा करते हुए लोहुमी के योगदान को अद्वितीय बताया।

पहाड़ प्रकाशन की संपादिका एवं महिला डिग्री कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. स्वाति मेलकानी ने स्व. लोहुमी पर आधारित पुस्तक के संपादन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में उनके महान कार्यों के ऐसे कई पहलू सामने आए, जिनसे अब तक व्यापक समाज अनजान था। उनके योगदान को व्यापक मंच मिलना चाहिए।

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. नरेन्द्र सिंह बनकोटी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि महाविद्यालय में पहाड़ के इस भूले-बिसरे नायक को याद किया गया। शासन-प्रशासन को उनके सरोकारों और योगदान का संज्ञान लेना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति निवास पंत ने किया। ‘हिमालयन डायलॉग्स’ की ओर से सुनीता भास्कर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर एमएससी, बीएससी और बायोटेक्नोलॉजी के छात्र-छात्राओं के साथ ही ग्रेटर नोएडा से पहुंचीं स्व. लोहुमी की पुत्री पुष्पा जोशी, विनोद लोहुमी, मनीषा धामी, ओपी पांडे, डॉ. नरेन्द्र सिजवाली, दीपक नौंगाई, डॉ. बीना लोहिया, नीलम धर्मसक्तू, डॉ. नीलम मनौला, डॉ. अंकिता चंदोला, श्रुति अग्रवाल और डॉ. आशुतोष पांडे समेत अनेक शिक्षक एवं प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री को भेजे जाएंगे चार प्रस्ताव

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से चार प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें उत्तराखंड के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में स्व. चन्द्रशेखर लोहुमी के जीवन, संघर्ष और वैज्ञानिक शोध कार्यों को शामिल करना, नैनीताल (कार्यक्षेत्र) अथवा अल्मोड़ा (गृह जनपद) के किसी उपयुक्त शैक्षणिक संस्थान का नाम उनके नाम पर रखना, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उनकी स्मृति में व्याख्यान, संगोष्ठियां और वैज्ञानिक गतिविधियां आयोजित करना तथा उनके ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं कार्यों का संकलन कर स्थायी संरक्षण करना शामिल है। इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री को प्रेषित किया जाएगा।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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