
चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान कहें या सिस्टम की खामी, कि सूखीढांग क्षेत्र में देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ त्याग देने वाले चार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव आमखर्क को मात्र डेढ़ किलोमीटर सड़क के लिए 79 वर्ष इंतजार करना पड़ा।
ये सेनानी ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जो कभी अपने लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए जिए। आजादी के बाद उन्होंने दूसरे गांवों के विकास कार्यों की पैरवी तो की, लेकिन अपने गांव की सड़क के लिए कभी किसी से कुछ नहीं कहा।
जब यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आई तो उन्होंने 3 जून 2023 को गांव को सड़क से जोड़ने की घोषणा कर दी। लेकिन मामला वन विभाग में जाकर उलझ गया। सेनानियों के निधन के बाद उनके पुत्र महेश चौड़ाकोटी लगातार प्रयास करते रहे, पर फाइल टस से मस नहीं हुई।
क्विक एक्शन के लिए पहचान बना चुके जिलाधिकारी मनीष कुमार के सामने जब यह मामला आया, तो उन्होंने कहा कि यह समस्या अब आपकी नहीं, हमारी है।
उन्होंने कहा था कि यदि पहले से ही मान लिया जाए कि काम नहीं हो सकता, तो समस्या और गहरी होती जाती है, जबकि प्रयास करने पर उसका प्रतिफल जरूर मिलता है। जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण में बाधक विभागीय अड़चनों को समझा और विभागीय समन्वय से उन्हें बहुत कम समय में दूर करा दिया।
इससे प्रसन्न होकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण परिषद के अध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने जिलाधिकारी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तो घोषणा कर अपना कर्तव्य निभा दिया था, लेकिन उसे धरातल पर उतारने में मामला उलझ गया था। जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यसंस्कृति के आगे समस्याएं कोई मायने नहीं रखतीं, इसका उन्हें प्रत्यक्ष अनुभव हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज भले ही गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी, पंडित बेणीराम, पंडित पद्मादत्त और बच्ची सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे बैकुंठ धाम से मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को अवश्य आशीर्वाद दे रहे होंगे। जिस दिन लोग सड़क से गांव पहुंचेंगे, वह दिन ऐतिहासिक होगा और उस दिन जिलाधिकारी का एक बार फिर वंदन-अभिनंदन किया जाएगा।
कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील दत्ताल ने बताया कि सड़क के लिए अनापत्ति मिल चुकी है और निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की रिपोर्ट ✍️)











