
चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। सुंदर आबोहवा, ठंडा पानी और स्वच्छ पर्यावरण छोड़कर मैदानी क्षेत्रों की भीड़ का हिस्सा बनना इसे हम दुर्भाग्य मानें या अज्ञानता, जबकि यहां रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
यहां के जैविक उत्पाद रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। लोगों की रुचि कम होने के बावजूद हमें निराश या हताश नहीं होना चाहिए। यह बात एसएसबी की पांचवीं वाहिनी के कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार, विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी मनीष कुमार से चर्चा के दौरान कही।
कमांडेंट के कार्यभार संभालने के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया जा रहा है, ताकि वे स्वयं रोजगार से जुड़ने के साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें। कमांडेंट का मानना है कि प्रकृति ने इस क्षेत्र पर जो नेमतें बरसाई हैं, उन्हें न पहचानकर लोग पलायन के रूप में जीवन की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं।
अब कमांडेंट और जिलाधिकारी ने ठान लिया है कि चम्पावत के शहद की जैविक मिठास सात समंदर पार के लोगों का जायका बदलेगी। पहाड़ और मैदान दोनों को समेटे इस जिले में हर प्रकार की वनस्पति, फल और फूल होते हैं, इसलिए यहां मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं।
अभी तक यहां के मौन पालकों ने माइग्रेशन सिस्टम नहीं अपनाया है। यदि यह प्रयास धरातल पर उतरा तो मौन पालन कुटीर उद्योग के रूप में पनपकर हर घर में आर्थिक समृद्धि का द्वार खोलेगा।
कमांडेंट ने कहा कि जैविक शहद की मार्केटिंग में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि एसएसबी की बटालियनों में ही इसकी आसानी से खपत हो सकती है। उन्होंने जिलाधिकारी की क्विक एक्शन वाली कार्यसंस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यह फौजियों को बहुत रास आती है। प्रशासनिक सहयोग मिलने से हर कार्य की गति तेज हो जाती है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में मौन पालन विशेषज्ञ की नियुक्ति की पहल की गई है। सफलता मिलने पर कार्यक्रम को नियोजित ढंग से लागू किया जाएगा। नेपाल सीमा से लगे गांवों में मौन पालन की संभावना इसलिए भी अधिक है, क्योंकि शीतकाल में जब हर जगह प्रकृति ठंड से सिकुड़ जाती है, तब महाकाली नदी घाटी में च्यूरा और सरसों फूलने लगते हैं, जो मधुमक्खियों का मुख्य आहार है।
जिलाधिकारी ने कहा कि हाल ही में नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों के दौरे में उन्होंने पाया कि वहां हर उत्पाद की अपार संभावनाएं हैं। मौन पालन को व्यापक स्तर पर चलाने का एसएसबी का प्रयास सीमा के प्रथम पंक्ति के गांवों में विकास और रोजगार का नया दीपक जलाएगा।
उन्होंने प्रसन्नता जताई कि एसएसबी के जवान सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ कमांडेंट के दिशा-निर्देशन में रोजगारपरक कार्यक्रमों को भी प्रभावी ढंग से चला रहे हैं।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)











