चंपावत के ‘एप्पल मैन’ का कमाल: बंजर जमीन पर उगाए 5000 सेब के पौधे, अब पूरे उत्तराखंड को दिखा रहे तरक्की की राह

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चंपावत, प्रेस 15 न्यूज। मेहनत, नवाचार और खेती के प्रति जुनून हो तो पहाड़ की जमीन भी खुशहाली की नई इबारत लिख सकती है। कठनोंली गांव के प्रगतिशील किसान भीम सिंह महर इसकी मिसाल बनकर उभरे हैं।

सेब उत्पादन और बागवानी में नए प्रयोगों के चलते उन्हें लोग ‘एप्पल मैन’ के नाम से जानते हैं। उनके बागान में तैयार हो रहे जैविक उत्पाद अब किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए भीम सिंह और उनकी बेटी पुष्पा को सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया।

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भीम सिंह ने पारंपरिक खेती को आधुनिक बागवानी से जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। कोरोना काल में उन्होंने खेती और बागवानी को विस्तार देते हुए वैज्ञानिक तरीके से पौधों की देखभाल और उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया।

उनके बागान में सेब की ग्रैनी स्मिथ प्रजाति के साथ ही तैड़ा, गेठी और अन्य पारंपरिक उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों के स्वाद और औषधीय गुणों के चलते इनकी मांग बढ़ रही है।

पांच हजार सेब के पौधों से संवार रहे भविष्य

भीम सिंह ने बड़े क्षेत्र में करीब पांच हजार सेब के पौधे लगाए हैं। बागान को जंगली जानवरों से बचाने के लिए तारबाड़ भी की गई है। वह जैविक तरीके से उत्पादन कर रहे हैं। उनके बागान को देखने और खेती-बागवानी के नए तौर-तरीके सीखने के लिए कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों से किसान पहुंचते रहे हैं। उनका मानना है कि पहाड़ में खेती को लाभकारी बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक फसलों और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय जरूरी है।

भीम सिंह के साथ उनका बेटा भरत भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है। अब उन्होंने अपनी बेटी पुष्पा को भी खेती-बागवानी से जोड़ लिया है। उनका कहना है कि उनका प्रयास है कि उत्तराखंड के किसानों को प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश जाने के बजाय उनके बागान में ही नए प्रयोगों को देखने और सीखने का अवसर मिले।

डीएम ने समझी परेशानी, बागान तक सड़क की उम्मीद

भीम सिंह के सामने अब तक अपने उत्पादों को सड़क तक पहुंचाना बड़ी चुनौती रहा है। बागान से उपज बाजार तक ले जाने में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती थी। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उनके बागान का निरीक्षण कर समस्याओं को समझा और सड़क की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की। इससे किसान को अपने बागान का विस्तार करने और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की उम्मीद जगी है।

भीम सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी मनीष कुमार किसानों की समस्याओं को समझते हैं। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में भी बागवानी और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन स्थानीय किसानों के प्रयासों का व्यापक प्रचार-प्रसार होना जरूरी है।

भीम सिंह का कहना है कि उत्तराखंड में खेती-बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत किसानों को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने की है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि कुमाऊं के किसानों को प्रशिक्षण के लिए हिमाचल भेजा जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर उनके जैसे प्रगतिशील किसानों के अनुभवों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम भी भीम सिंह के प्रयासों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वह स्थानीय लोगों को अपनी मिट्टी से जुड़कर गांवों में ही रोजगार के अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

भीम सिंह का मानना है कि किसानों को इसी तरह प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलती रहीं तो चंपावत में भी सैकड़ों किसान खेती-बागवानी को रोजगार का मजबूत माध्यम बना सकते हैं। उनका बागान इस उम्मीद को मजबूत कर रहा है कि पहाड़ में रहकर भी मेहनत और नवाचार के दम पर अपनी तकदीर बदली जा सकती है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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