
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। लगातार कटते पेड़ों और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच उत्तराखंड में हरियाली की उम्मीद जगाने वाली एक अनोखी पहल शुरू हुई है। पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त ने इस वर्ष 35 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया है।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी से शुरू हुआ यह अभियान अब घर-घर फलदार पौधे पहुंचाने और लोगों, खासकर बच्चों, को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का माध्यम बनता जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तराखंड में एक प्रेरणादायी पहल देखने को मिल रही है। पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त के नेतृत्व में 14 जुलाई से वृहद पौधरोपण अभियान लगातार जारी है। इस वर्ष 35 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे सितंबर तक पूरा करने की उम्मीद जताई गई है।
अभियान की शुरुआत 14 जुलाई को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी से हुई, जिसका शुभारंभ सांसद अजय भट्ट ने किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन लोहनी के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर के लिए 500 पौधे उपलब्ध कराए गए। विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधरोपण में भाग लिया।
अभियान के तहत हल्दूचौड़, कालाढूंगी, चकलुआ, जज फार्म, दमुवाढूंगा, हंसविहार-शांतिविहार, रुद्रपुर सहित कई क्षेत्रों में लोगों को उनके घरों में लगाने के लिए फलदार एवं छायादार पौधे वितरित किए जा रहे हैं।
सोमवार सुबह हल्द्वानी के क्वींस पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में लगभग एक हजार विद्यार्थियों को पौधरोपण और पॉलीथीन के उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया गया। जिन विद्यार्थियों के घरों में पर्याप्त जगह है, उन्हें फलदार पौधे भी भेंट किए गए।
डॉ. पन्त ने कहा कि “प्राणवायु के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। विकास आवश्यक है, लेकिन जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उतने लगाए नहीं जा रहे। हर नागरिक को पेड़ों के संरक्षण और अधिक से अधिक पौधरोपण के लिए आगे आना होगा।”
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन दो से तीन स्थानों पर पौधरोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान को सफल बनाने में महेश तिवारी, कपिल राणा, मनोज पाठक, आनंद भाकुनी, गिरीश जोशी, नित्यानंद जोशी, आर.पी. सिंह, संजय त्यागी, संजय बिरखानी और दीपक नेगी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।









