
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। चार दशक के करीब समय से बिना किसी सरकारी आर्थिक सहायता के पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत की निःस्वार्थ सेवा को बड़ा सम्मान मिला है।
वर्ष 1988 से अब तक 4 लाख 65 हजार से अधिक पौधे लगाकर और हजारों लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करने वाले डॉ. पंत को उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग ने उनके उल्लेखनीय पर्यावरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के उस सतत अभियान का सम्मान है, जिसने पिछले 38 वर्षों से उत्तराखण्ड में हरियाली बढ़ाने का संकल्प निभाया है।
उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग द्वारा उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सभागार में महिला सुरक्षा विषय पर संगोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिला पुलिस कर्मियों तथा विधिक सेवा अधिकारियों का राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करना था।
इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगभग चार दशक से किए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत को राज्य महिला आयोग द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, विधायक मोहन सिंह बिष्ट, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी तथा जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
38 वर्षों से निःस्वार्थ हरियाली का अभियान
डॉ. आशुतोष पंत वर्ष 1988 से बिना किसी सरकारी या संस्थागत आर्थिक सहायता के पर्यावरण संरक्षण का अभियान चला रहे हैं। अपने पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से शुरू किए गए इस अभियान के तहत वे अब तक 4 लाख 65 हजार से अधिक पौधे रोपित एवं वितरित कर चुके हैं। उनका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखकर हरियाली को स्थायी बनाना है।
हर वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर वे हजारों लोगों को निःशुल्क फलदार पौधे उपलब्ध कराते हैं। इस वर्ष उन्होंने 35 हजार से अधिक पौधे लगाने और पाँच लाख पौधों का ऐतिहासिक आँकड़ा पार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आम, अमरूद, कटहल, सहजन, आंवला, अनार और माल्टा जैसे फलदार पौधों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के लिए करौंदा, नींबू और शरीफा जैसे कम स्थान में विकसित होने वाले पौधे भी निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनकी केवल एक ही अपील है कि पौधे लेने वाले उन्हें प्रेम से लगाएँ और उनकी देखभाल करें।
डॉ. पंत का मानना है कि बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग, गिरते भूजल स्तर और तेजी से घटती हरियाली के बीच पौधरोपण ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा निवेश है। वे वर्षों से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हुए समाज में हरियाली की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।









