
हल्द्वानी/नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। अगर आपका कोई मुकदमा अदालत में लंबित है और लगातार तारीखों के कारण समय, धन और ऊर्जा खर्च हो रही है, तो यह खबर आपके काम की है।
12 सितंबर 2026, शनिवार को देशभर के साथ उत्तराखंड में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे आपसी सहमति और समझौते के जरिए अपने विवादों का त्वरित समाधान कराएं। उत्तराखंड में 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से भी निर्धारित है।
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने बताया कि इस समय दो महत्वपूर्ण विधिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें पहला “मध्यस्थता से समाधान- Mediation 3.0” अभियान है, जबकि दूसरा राष्ट्रीय लोक अदालत है।
31 दिसंबर तक चलेगा Mediation 3.0 अभियान
माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशन में पूरे देश में तीसरी बार Mediation 3.0 अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 अगस्त 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जनपद न्यायालयों में लंबित मामलों को प्रशिक्षित मध्यस्थों (Mediator) के माध्यम से आपसी सहमति से निस्तारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
सदस्य सचिव ने बताया कि प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध हैं। ऐसे में कोई भी पक्षकार अभियान की अवधि के दौरान अपने लंबित मामले को समझौते के आधार पर निस्तारित करा सकता है।
12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, लंबित मामलों के साथ नए विवाद भी होंगे शामिल
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर 12 सितंबर 2026, शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। उत्तराखंड में भी इसी दिन लोक अदालत लगेगी।
उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के लिए उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति तथा जिला न्यायालयों में लंबित मामलों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की देखरेख में इसका आयोजन किया जाएगा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में आधिकारिक सूचना जारी की है।
खास बात यह है कि लोक अदालत में केवल अदालतों में पहले से लंबित मामलों का ही निस्तारण नहीं होगा, बल्कि प्री-लिटिगेशन मामले भी लिए जाएंगे। यानी ऐसे विवाद, जो अभी अदालत तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन भविष्य में मुकदमे का रूप ले सकते हैं, उन्हें भी आपसी समझौते से सुलझाने का अवसर मिलेगा।
“समझौते में दोनों पक्ष जीतते हैं”
प्रदीप मणि त्रिपाठी ने आमजन से अपील की कि जिन लोगों के मुकदमे न्यायालयों में लंबित हैं, वे 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाकर अपने मामलों का निस्तारण कराने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि एक कहावत है कि “Bad compromise is better than a good lawsuit” यानी कितना भी बुरा समझौता हो, अच्छे से अच्छे मुकदमे के फैसले से बेहतर होता है।
उन्होंने समझाया कि मुकदमे में एक पक्ष जीतता है और दूसरा हारता है, इसके बाद अपील की संभावना भी रहती है। इसके विपरीत समझौते में दोनों पक्ष जीतते हैं, मामला तत्काल निस्तारित हो जाता है, अपील की स्थिति नहीं रहती, आपसी वैमनस्य खत्म होता है और भाईचारा कायम रहता है।
लोक अदालत में समझौता होने पर उसका निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है तथा उसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता। लंबित मामले के समझौते पर न्यायालय शुल्क वापसी का भी प्रावधान है।
ऐसे में अदालतों में लंबित मामलों और भविष्य में मुकदमे का रूप लेने वाले विवादों से जुड़े पक्षकारों के लिए 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत विवाद को लंबा खींचने के बजाय आपसी सहमति से समाधान का महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।









