‘बीमारी आपने दी है, इलाज भी आप कराएंगे’… ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में हाईकोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार

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नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों के मामले में आज जिलाधिकारी, सीएमओ, जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को सुनते हुए प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित टेस्टिंग लैब के संबंध में संबंधित सचिव से जल्द निर्णय लेने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ रश्मि पंत, एसई जल संस्थान विशाल कुमार, एसई जल निगम अनीश कुमार और चीफ इंजीनियर आलोक को सुना।

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याचिकाकर्ता अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से दस से अधिक मेडिकल रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गईं, जिनमें मरीजों की लिवर संबंधी नकारात्मक रिपोर्ट दर्ज थी।

21वीं सदी में ऐसा ठीक नहीं’

सुनवाई की शुरुआत में वरिष्ठ न्यायाधीश ने सरकारी अमले से कहा कि “21वीं सदी में ऐसा ठीक नहीं है।” न्यायालय ने पानी की गुणवत्ता की जांच निजी टेस्ट लैब से कराने को कहा और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

खंडपीठ ने जिलाधिकारी से मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए किसी योजना के बारे में भी पूछा। न्यायालय ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाने में संकोच न किया जाए।

न्यायालय ने जल संस्थान और जल निगम को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सीवर और पेयजल आपस में मिक्स न हों। न्यायालय ने यह भी सवाल किया कि कंटेमिनेशन का पता चलने के बाद समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।

डीएम को प्रभावित लोगों तक टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाना सुनिश्चित करने को कहा गया। अधिवक्ताओं के कहने पर न्यायालय ने नैनीताल में भी पानी की टेस्टिंग और सीवर लीकेज की जांच कराने के निर्देश दिए। न्यायालय ने 20 से 25 अलग-अलग स्थानों से सैंपल लेकर टेस्टिंग कराने को कहा।

अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि डीएम ने मरीजों की प्राइवेट टेस्ट लैब में जांच के लिए चार लाख रुपये जारी किए हैं, जिन्हें आगे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जाएगा। नैनीताल में सीवर लीकेज की शिकायतों के समाधान के लिए डीएम हेल्पलाइन नंबर जारी करने को भी कहा गया है। न्यायालय ने कहा कि “बीमारी आपने दी है, इलाज भी आप कराएंगे।”

सात गांवों में मेडिकल टीमें तैनात

सीएमओ रश्मि पंत ने न्यायालय को बीमारी की वजह बताते हुए कहा कि पानी दूषित है। उन्होंने बताया कि मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के अंतर्गत होगा। प्रभावित क्षेत्र के सभी लोगों की टेस्टिंग और सरकारी अस्पतालों में इलाज जिलाधिकारी की ओर से कराया जाएगा।

जिलाधिकारी की ओर से एलाइजा टेस्ट के लिए रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। सीएमओ ने बताया कि सात गांवों में मेडिकल टीमें तैनात हैं। टीमें घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस का घोल वितरित करेंगी। कुल 8 डॉक्टर और एक एंबुलेंस मौके पर तैनात की गई हैं।

जल संस्थान ने बताई जांच और कंटेमिनेशन की स्थिति

जल संस्थान की ओर से न्यायालय को बताया गया कि टेस्ट सोर्स से शुरू कराया गया था और पानी में क्लोरीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग ने कहा कि क्लोरीन के इस्तेमाल से पानी से 100 प्रतिशत बैक्टीरिया मर जाता है।

जल संस्थान की ओर से बताया गया कि 2022 और 15 जनवरी 2026 में कुमाऊं की टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए सरकार को आवेदन किया गया था। विभाग ने न्यायालय से संबंधित सचिव से रुपये जारी करने को कहने का अनुरोध किया।

विभाग के अनुसार, पहली बार 11 मार्च को सैंपल लिया गया था, जिसमें सब ठीक पाया गया और कंटेमिनेशन नहीं मिला। विभाग ने कहा कि लोकल धारों से सीवर मिक्स हो रहा है।

पीएचसी में बड़ी संख्या में पहुंचे मरीज

याचिकाकर्ता अधिवक्ता रवि बिष्ट ने बताया कि गांव के पीएचसी सेंटर में कल से 85 और आज सुबह 25 लोगों ने बीमारी की जांच के लिए ओपीडी कराई।

डीएम ललित मोहन रयाल ने न्यायालय को बताया कि जांच में सामने आया है कि पुराने कूड़ा खड्ड के समीप स्रोत और सीवर का पानी मिक्स होकर बह रहा है, जिससे लोगों को नुकसान हुआ है।

प्रदूषण बोर्ड को छह दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

खंडपीठ ने टेस्टिंग लैब को लेकर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने रीजनल ऑफिसर, जिला नैनीताल प्रदूषण बोर्ड को आज ही सैंपल लेने और छह दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने स्थिति को महामारी का नाम देते हुए जिलाधिकारी को राहत कार्यों की स्वयं मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

(नैनीताल से वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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