रहिए सतर्क: सिर्फ 3% कमीशन के लिए न बेचें अपना बैंक खाता, हल्द्वानी में पकड़े गए छह शातिर, आंखें खोलने वाला मामला

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। अगर कोई व्यक्ति आपके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या मोबाइल सिम के बदले कमीशन देने का लालच दे रहा है, तो सावधान हो जाइए।

आपका बैंक खाता महज कुछ हजार रुपये के लालच में करोड़ों की साइबर ठगी के पैसों को खपाने का जरिया बन सकता है और इसका खामियाजा खाताधारक को भी कानूनी कार्रवाई के रूप में भुगतना पड़ सकता है। हल्द्वानी के मुखानी क्षेत्र में सामने आया एक मामला इसी खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

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लक्ष्मण विहार कॉलोनी में हुई कार्रवाई के दौरान एक ऐसे कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो म्यूल बैंक खातों, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और अनधिकृत ऐप के जरिए साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने में जुटा था।

मामले में मुख्य सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो किशोरों को संरक्षण में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने महज करीब चार महीने में पांच करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की है।

ऐसे चलता था पूरा खेल

मामले में सामने आए तरीके के मुताबिक मुख्य आरोपी राहुल यादव बाइनेंस ऐप के जरिए नकद रकम जुटाकर यूएसडीटी (USDT) खरीदता था। इसके बाद टेलीग्राम के जरिए प्राप्त ‘UMASTER’ ऐप पर बिना वैध दस्तावेज, केवाईसी और स्रोत सत्यापन के प्रतिदिन करीब चार से पांच लाख रुपये मूल्य की USDT बेची जाती थी। इसके बदले तीन प्रतिशत अतिरिक्त मुनाफे और बोनस का लालच दिया जाता था।

गिरोह का अगला निशाना ऐसे बैंक खाते होते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को घुमाने और निकालने के लिए किया जा सके। आरोप है कि स्थानीय युवाओं को तीन प्रतिशत कमीशन का लालच देकर अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक हासिल किए जाते थे।

इन खातों में आने वाली रकम को एटीएम से नकद निकाला जाता था। ज्यादा नकदी होने पर कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) के जरिए दूसरे बैंक खातों में रकम जमा अथवा स्थानांतरित की जाती थी। इतना ही नहीं, खाताधारक रकम का इस्तेमाल न कर सके, इसके लिए उसके सिम कार्ड भी अपने पास रखे जाते थे।

यानी जिस व्यक्ति को यह महज ‘खाता देने के बदले तीन प्रतिशत कमीशन’ का आसान सौदा नजर आ रहा था, वह अनजाने में साइबर अपराध की पूरी चेन का हिस्सा बन सकता था।

मुख्य सरगना समेत छह आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

1. राहुल यादव (30 वर्ष) पुत्र अजय यादव, निवासी पंचवटी नगर, इंदौर, मध्य प्रदेश। उसे गिरोह का गैंग लीडर/मुख्य संचालक बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह बाइनेंस के जरिए USDT खरीदने और अनधिकृत ‘UMASTER’ ऐप पर उसकी बिक्री से जुड़े नेटवर्क का संचालन करता था। वह पूर्व में थाना इंदौर ग्रामीण में धारा 420/409 भादवि के मामले में जेल जा चुका है।

2. हर्षित कुमार (26 वर्ष) पुत्र भरतवीर, निवासी गैस गोदाम रोड, शिव विहार, मुखानी, नैनीताल। पुलिस के अनुसार, उसकी भूमिका म्यूल खातों से एटीएम के जरिए नकदी निकालने और सीडीएम में रकम जमा करने की थी।

3. कमल गोस्वामी (21 वर्ष) पुत्र नवीन गोस्वामी, निवासी तल्ली दीनी, मुक्तेश्वर, नैनीताल। उस पर कमीशन के बदले म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।

4. साहिल कुमार (21 वर्ष) पुत्र स्व. जीवन राम, निवासी काण्डा, बागेश्वर, हाल निवासी दमुवाढुंगा, नैनीताल। पुलिस के अनुसार, वह भी म्यूल खाते उपलब्ध कराने के काम में शामिल था।

5. मोहम्मद अयान (20 वर्ष) पुत्र मोहम्मद यामीन, निवासी ग्राम कोरबकू, भोजपुर, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश। उसकी भूमिका इन्वेस्टर के रूप में बताई गई है।

6. मोहम्मद शुभान (24 वर्ष) पुत्र वाजिद हुसैन, निवासी ग्राम सलारपुरकला, सम्भल, उत्तर प्रदेश। उसे भी इन्वेस्टर बताया गया है।

इसके अलावा मामले में दो वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। दो विधि-विवादित किशोरों को संरक्षण में लेकर बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के संरक्षण में अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया गया है।

लाखों की नकदी और बैंकिंग सामान बरामद

आरोपियों के कब्जे से 1,18,800 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा एक डेल लैपटॉप मय चार्जर, एक एप्पल आईपैड और 11 स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिनमें आईफोन 17 प्रो, आईफोन 14 प्रो, सैमसंग गैलेक्सी एस24 और एस22 अल्ट्रा आदि शामिल हैं।

बैंकिंग से जुड़ी सामग्री में 24 विभिन्न बैंकों के सक्रिय एटीएम/डेबिट कार्ड, 12 सक्रिय सिम कार्ड, छह चेकबुक, चार पासबुक और 16 बैंक जमा/सीडीएम पर्चियां शामिल हैं।

मामले में कोतवाली मुखानी में मु०अ०सं० 141/2026 के तहत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C), 66(D) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 318(4) में मुकदमा दर्ज किया गया है।

बैंक खाता किसी को देना कितना खतरनाक?

इस मामले की सबसे बड़ी सीख उन लोगों के लिए है, जिन्हें कोई अनजान व्यक्ति ‘खाता इस्तेमाल करने दो, हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन मिलेगा’ जैसे ऑफर देता है। बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक या सिम किसी दूसरे व्यक्ति को देना सिर्फ एक सामान्य लेन-देन नहीं है। यदि उसी खाते से ठगी या अवैध धन का लेन-देन हुआ तो खाताधारक भी जांच और कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।

लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन या पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड या सिम इस्तेमाल के लिए न दें। किसी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की जानकारी होने पर तत्काल नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।

साइबर अपराध से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी को न दें और अपने खाते से होने वाले हर लेन-देन पर नजर रखें।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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