
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सीखने की निरंतर ललक हो तो उम्र या परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। इस बात को साबित किया है उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत मनोज पाण्डे ने। उन्होंने यूजीसी-नेट जून 2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है।
मनोज पाण्डे इससे पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। वर्तमान में उनकी पीएचडी भी जारी है, जिससे शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का उनका प्रयास लगातार जारी है।
मनोज पाण्डे की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि शिक्षा और शोध की दुनिया में कदम रखने से पहले वह भारतीय सेना की 5 कुमाऊँ बटालियन, कुमाऊँ रेजिमेंट केंद्र में 15 वर्षों तक देश की सेवा कर चुके हैं। सेना की कठोर दिनचर्या और अनुशासन से निकला उनका सफर अब ज्ञान, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रहा है।
देशसेवा से ज्ञानसेवा तक का यह सफर युवाओं के लिए खास संदेश देता है मंजिल बदल सकती है, लेकिन मेहनत और संकल्प नहीं बदलना चाहिए। मनोज पाण्डे की सफलता बताती है कि यदि व्यक्ति सीखने और आगे बढ़ने का जुनून बनाए रखे तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो किसी लक्ष्य को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अनुशासन, निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास यही वह रास्ता है, जो सपनों को सफलता में बदलता है।









