
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। किसी के लिए जिंदगी का अंत, किसी दूसरे के लिए रोशनी की नई शुरुआत बन सकता है। मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति की दुनिया में उजाला ला सकता है। इसी मानवीय संदेश के साथ नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में नेत्र सर्जन डॉ. विराज राठी ने लोगों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि यह केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का अवसर है।
उन्होंने बताया कि नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया का उपयोग उन दृष्टिबाधित मरीजों के उपचार में किया जा सकता है, जिनकी आंखों की रोशनी कॉर्निया संबंधी बीमारी के कारण प्रभावित हुई है।
भ्रांतियां छोड़ें, नेत्रदान को समझें
डॉ. राठी ने कहा कि समाज में नेत्रदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां अभी भी मौजूद हैं। जागरूकता के अभाव में लोग इस पुनीत कार्य से पीछे हट जाते हैं। उन्होंने लोगों से इन भ्रांतियों को दूर करने और नेत्रदान के वैज्ञानिक एवं मानवीय महत्व को समझने की अपील की।
उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए उम्र अपने आप में बड़ी बाधा नहीं है और मृत्यु के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ऐसे में परिवार के सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
डॉ. राठी ने आमजन से नेत्रदान का संकल्प लेने के साथ-साथ अपने परिवार और परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला बन सकता है।
इस अवसर पर चिकित्सालय के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने भी नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा समाज में नेत्रदान की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)









