
हरिद्वार/ हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। धरती को रहने लायक बनाए रखने के लिए सरकारी योजनाओं और अभियानों से इतर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को अपना जीवन मिशन बना चुके हैं। पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद डॉ. आशुतोष पंत ऐसे ही एक पर्यावरण प्रहरी हैं, जो पिछले कई वर्षों से बिना किसी सरकारी मदद के अपने प्रयासों से लगातार पौधे लगा रहे हैं और उनके संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
डॉ. पंत के लिए वृक्षारोपण महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जुनून है। यह जुनून उन्हें अपने पिता से मिले संस्कारों से मिला है। यही वजह है कि उम्र, दूरी और संसाधनों की परवाह किए बिना वह लगातार अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर पौधे लगाते हैं और लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हैं।
उनके इसी अभियान के तहत 30 अगस्त को हरिद्वार के गेंडीखाता स्थित मृत्युंजय मिशन संस्थान में वृहद वृक्षारोपण किया गया। पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात मर्म चिकित्सक डॉ. सुनील जोशी के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में पौधे लगाने के साथ स्थानीय लोगों को घरों में लगाने के लिए फलदार पौधे भी वितरित किए गए।
इसके बाद 31 अगस्त को राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। यह डॉ. पंत के इस वर्ष के अभियान का 92वां कार्यक्रम था। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. पंकज सिंह के सहयोग से पौधे उपलब्ध कराए गए। डॉ. पल्लवी पांडे की देखरेख में यहां 200 से अधिक पौधे लगाए गए, जबकि आने वाले दिनों में और पौधे लगाने की तैयारी है।
अभियान में डॉ. पंत के मित्र डॉ. जगदीश सती हल्द्वानी से उनके साथ पहुंचे। हरिद्वार के समाजसेवी योगेश पांडे, नेत्र सर्जन डॉ. दिनेश सिंह, एमडी पैथोलॉजी डॉ. मुकेश मिश्रा, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. विजय विक्रम सिंह, फिजीशियन डॉ. संजय साह और डीएवी पब्लिक स्कूल हरिद्वार के प्रधानाचार्य मनोज कपिल ने भी पौधे रोपकर अभियान में सहभागिता की।
डॉ. पंत ने विशेष रूप से पैथोलॉजी विभाग के डॉ. नवीन थपलियाल के प्रति आभार जताया, जो पिछले कई वर्षों से उनके पर्यावरण संरक्षण अभियान में लगातार साथ दे रहे हैं।
अब ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज हरिद्वार और बहादराबाद में भी अगले दो दिनों में वृक्षारोपण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
डॉ. पंत का संदेश साफ है कि पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं, उनका संरक्षण भी जरूरी है। पेड़ पानी के चक्र को बनाए रखने, तापमान नियंत्रित करने और जीवनदायी ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि हरियाली बची रहेगी, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन सुरक्षित रहेगा।
सरकारी सहायता के बिना वर्षों से लगातार चल रहा यह अभियान बताता है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती कभी-कभी एक व्यक्ति का जुनून भी पूरी धरती को हरा करने की शुरुआत बन जाता है।









