Haldwani: जिस बोली में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू है, उसी कुमाऊँनी ने APS के नैतिक को दिलाया पहला स्थान

खबर शेयर करें -

हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कुमाऊँनी सिर्फ बोलचाल की भाषा नहीं, यह पहाड़ की मिट्टी, लोकसंस्कृति, परंपराओं और हमारी जड़ों की आवाज है। बदलते दौर में जब नई पीढ़ी अपनी लोकभाषाओं से दूर होती जा रही है, ऐसे में बच्चों का कुमाऊँनी को मंच पर गर्व के साथ अपनाना उम्मीद की एक खूबसूरत किरण है।

आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल के नैतिक पांडेय की सफलता यही संदेश देती है कि अपनी मातृभाषा से जुड़कर भी नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकती है और अपनी संस्कृति का मान बढ़ा सकती है।

Ad

सौहार्द जन सेवा समिति की ओर से आयोजित कुमाऊँनी भाषा सम्मान एवं अंतर्विद्यालयी प्रतियोगिता में आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल, लामाचौड़ के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता में हल्द्वानी के करीब 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

प्रतियोगिता में आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल की कक्षा 8 के छात्र नैतिक पांडेय ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति, आत्मविश्वास और कुमाऊँनी भाषा के प्रति समर्पण से निर्णायकों को प्रभावित करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। नैतिक की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है।

वहीं विद्यालय की कक्षा 11 की छात्रा उन्नति दुम्का ने भी प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। दोनों विद्यार्थियों के प्रदर्शन की विद्यालय परिवार ने सराहना की।

विद्यालय के प्रबंधक भुवन चंद्र उपाध्याय ने नैतिक पांडेय और उन्नति दुम्का को बधाई देते हुए कहा कि कुमाऊँनी केवल हमारी भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और जड़ों से जुड़ी अमूल्य विरासत है। बच्चों का अपनी मातृभाषा में आगे बढ़कर प्रतिभाग करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करना गर्व की बात है।

ऐसी प्रतियोगिताएँ नई पीढ़ी को अपनी लोकभाषा और संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी पैदा करती हैं। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी मिट्टी, भाषा और संस्कारों से भी जुड़े रहें।

विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाचार्य ने दोनों विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय परिवार ने कहा कि कुमाऊँनी भाषा जैसी लोकभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में नई पीढ़ी की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा, लोकसंस्कृति और क्षेत्रीय विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
1
+1
0
+1
0
+1
0

Ad

संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

सम्बंधित खबरें