
देवीधुरा, प्रेस 15 न्यूज। विश्व प्रसिद्ध मां बाराही धाम में बग्वाल मेले के बीच शताब्दियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया। मुख्य बाजार बाराही की शोभायात्रा के दूसरे दिन बाराही धाम परिसर स्थित सभी मंदिरों और धार्मिक स्थलों की विशेष सफाई की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में पंचगव्य का छिड़काव कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
बाराही धाम की तीन विशाल शिलाओं के बीच स्थित अलौकिक गब्यूरी में भी विशेष अनुष्ठान किया गया। मान्यता है कि यहां अखंड ज्योति शताब्दियों से प्रज्वलित है। वर्ष में इसी दिन गब्यूरी की विशेष सफाई की जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जब क्षेत्र में सूखे की स्थिति बनती है और बारिश का इंतजार रहता है, तब श्रद्धालु सदियों से इस पवित्र स्थल पर जलधारा अर्पित करते आ रहे हैं। आस्था है कि इसके बाद मेघराज प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में वर्षा होती है। इसी अवसर पर बाराही धाम स्थित प्राचीन नौले की भी विशेष सफाई और पूजा की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जब मां बाराही को इस पवित्र स्थान पर विराजमान किया गया, उसी समय यहां जलधारा फूटी थी। तब से श्रद्धालु इस जल का उपयोग पीने के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भी करते आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में भी यह नौला सूखता नहीं है। इसके पानी में मिठास और औषधीय गुण होने की मान्यता है। श्रद्धालु इसे मां बाराही का प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं। धाम में इस दिन विशेष प्रसाद भी तैयार किया गया। सभी देवी-देवताओं को भोग लगाने के बाद चार खाम और सात थोक के लोगों ने प्रसाद और पंचगव्य को अपने घर ले जाकर उसका छिड़काव किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पारंपरिक अनुष्ठान आचार्य कीर्ति शास्त्री के पुरोहितत्व में चार खाम-सात थोक के लोगों तथा फुलारा खाम के देवी सेवक खुशहाल सिंह की मौजूदगी में संपन्न हुआ। बाराही धाम की परंपरा के अनुसार इसी दिन मंदिर के पुजारी की अदला-बदली भी की गई। अब तक गुरना गांव के महेश पुजारी मां बाराही की पूजा-अर्चना कर रहे थे। आगामी एक वर्ष तक टकना गांव के हरिदत्त पुजारी धाम में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालेंगे।
उधर बाराही धाम का व्यापारिक मेला भी अब पूरे यौवन पर पहुंचने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए देवीधुरा पहुंच रहे हैं। मेले में स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं की भी खूब मांग है।
धुनाघाट निवासी कैलाश राम द्वारा हाथ से तैयार की गई लोहे की कढ़ाइयां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पारंपरिक तरीके से तैयार इन कढ़ाइयों को काली कुमाऊं की खास सौगात माना जाता है। मेले में पहुंच रहे लोग इन कढ़ाइयों को खरीदने में खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
बाराही धाम में एक ओर जहां धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए सदियों पुरानी परंपराएं जीवंत हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक मेले में बढ़ती भीड़ पहाड़ की लोक संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की रौनक को भी नई पहचान दे रही है।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)









