
कोटाबाग, प्रेस 15 न्यूज। कोटाबाग के अवलाकोट में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 137वें एपिसोड का सामूहिक प्रसारण किया गया।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि विकास जोशी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र की मातृशक्ति ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। सभी ने एक साथ बैठकर प्रधानमंत्री के प्रेरक विचारों को सुना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेशों पर चर्चा की।
‘मन की बात’ के सामूहिक प्रसारण के बाद बच्चों को नशे से दूर रहने तथा खेलों से जुड़कर स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया गया।
इस दौरान कलियाजाला, पतलिया, सौंजाला और मायारामपुर क्षेत्र के बच्चों को वॉलीबॉल और नेट वितरित किए गए। खेल सामग्री मिलने पर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। आयोजकों ने बच्चों को समझाया कि खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि विकास जोशी, छात्र संघ अध्यक्ष दीपक जोशी, गिरीश पढ़ालनी, रवि जोशी समेत गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सामाजिक सरोकारों को जमीन पर उतार रहे गुंजन तिवारी
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें खेलों से जोड़ने की पहल को लेकर पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के संस्थापक एवं समाजसेवी गुंजन तिवारी के सामाजिक प्रयासों की भी चर्चा रही।
कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में गुंजन तिवारी सामाजिक कार्यों के लिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ब्याज मुक्त ऋण योजना, नशे के खिलाफ ‘खेल से नाता जोड़ो’ अभियान, युवाओं को अपनी संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने के प्रयास, गांव-गांव स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन तथा सरकारी विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर प्यूरीफायर और फिल्टर की व्यवस्था जैसे कार्यों के माध्यम से वह लगातार सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं।
खास तौर पर युवाओं को नशे से बचाने के लिए खेलों को माध्यम बनाने की पहल को क्षेत्र में सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है। उनका मानना है कि यदि युवाओं को खेल, शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
इन सामाजिक पहलों के चलते अब क्षेत्र में गुंजन तिवारी को 2027 के विधानसभा चुनाव में बतौर जनप्रतिनिधि आगे लाने की मांग भी स्थानीय स्तर पर उठने लगी है। समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों के जरिए सक्रिय रहने वाले व्यक्ति को राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने से जनसमस्याओं को मजबूती से उठाने का अवसर मिल सकता है।








