पहाड़ के विधायक के धरने का बड़ा असर! सीडीओ और बीडीओ की कुर्सी हिली

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Major impact of the MLA’s sit-in! CDO and BDO’s positions shaken. विधायक के धरने का असर आखिरकार दिखा। विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विधायक के मोर्चा खोलने के बाद प्रशासन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ और बीडीओ के तबादले की कार्रवाई सामने आई है। विधायक के आरोपों के बाद उठे सवालों ने अब अधिकारियों की कुर्सी तक हिला दी है।

लोहाघाट विधायक खुशाल सिंह अधिकारी के हालिया धरना-प्रदर्शन के बाद चम्पावत में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। शासन ने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती का चम्पावत से पौड़ी जनपद के लिए स्थानांतरण कर दिया है। उनके स्थान पर परियोजना निदेशक अजय सिंह को प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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सीडीओ खाती से तल्ख अंदाज में रूबरू होते विधायक खुशाल सिंह अधिकारी।

स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद डॉ. खाती कार्यभार से मुक्त होकर नए तैनाती स्थल के लिए रवाना हो गए। वहीं परियोजना निदेशक अजय सिंह ने प्रभारी सीडीओ का दायित्व संभाल लिया है।

बताया जा रहा है कि विधायक खुशाल सिंह अधिकारी ने हाल में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रशासन के खिलाफ धरना दिया था। इसके बाद हुए इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि स्थानांतरण आदेश में इसके कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

इधर, पाटी विकासखंड की खंड विकास अधिकारी मोनिका पाल का भी स्थानांतरण किया गया है। गौरतलब है कि पाटी ब्लॉक की जिम्मेदारी विधायक खुशाल सिंह अधिकारी के पुत्र शंकर सिंह अधिकारी के पास ब्लॉक प्रमुख के रूप में है।

प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब नए प्रभारी सीडीओ के सामने जिले में विकास कार्यों और विभागीय समन्वय को गति देने की चुनौती होगी।

बताते चलें कि लोहाघाट की पंचायतों में कथित मनमानी और कमीशनखोरी के आरोपों को लेकर बीते शुक्रवार को विकास भवन में जमकर हंगामा हुआ था। विधायक खुशाल सिंह अधिकारी पंचायत प्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सीडीओ कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने डीपीआरओ, सीडीओ, पीडी व एपीडी के सामने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

विधायक ने संबंधित जेई पर पंचायत प्रतिनिधियों के उत्पीड़न और कथित कमीशन मांगने के आरोप लगाते हुए उसे तत्काल हटाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि पाटी ब्लॉक में करीब 85 ग्राम प्रधानों के बीच एक ही जेई की तैनाती है और लंबे समय से जनप्रतिनिधि उसकी कार्यशैली से परेशान हैं।

करीब ढाई घंटे चले धरने के बाद डीपीआरओ ने जेई को हटाने के संबंध में लिखित पत्र विधायक को सौंपा, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ था। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेई की नियुक्ति पंचायती राज निदेशालय के माध्यम से उपनल से हुई है और उसे हटाने का अधिकार जिला स्तर पर नहीं है।

सीडीओ डॉ. जीएस खाती ने कहा था कि विधायक के आरोपों की जांच के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी। अब तक किसी ग्राम प्रधान या पंचायत प्रतिनिधि की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिली थी। शिकायत मिलती तो पहले ही जांच कराई जा सकती थी।

धरने में प्रकाश मेहरा, अमर सिंह कोटियाल, अजय बिष्ट, पुष्कर सामंत, ललित वर्मा, भवन बोरा और अजय गोरखा समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

उप परियोजना निदेशक विम्मी जोशी ने अपने ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी कार्यशैली और ईमानदारी पर सवाल उठाना उचित नहीं है। घटनाक्रम से आहत होकर वह बाद में कार्यालय से चली गईं थी।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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