लोहाघाट: सड़क के लिए तरसता घिंघारुकोट, मरीज डोली में और उम्मीदें फाइलों में

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लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और पलायन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पाटी विकासखंड के सुदूरवर्ती तोक घिंघारुकोट की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव को चार किलोमीटर मोटर मार्ग से जोड़ने की घोषणा की थी।

घोषणा के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि वर्षों की कठिनाई खत्म होगी, लेकिन करीब तीन साल बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका। आज भी गांव तक पहुंचने के लिए कोई मोटर मार्ग नहीं है। उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे पैदल रास्ते ही ग्रामीणों की मजबूरी हैं। बीमार पड़ने पर मरीजों को डोली या परिजनों के कंधों पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है।

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गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना इसी दुर्गम रास्ते से गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि घोषणा के बाद भी विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।

गांव के बुजुर्गों का दर्द सबसे ज्यादा झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि जीवनभर सड़क का इंतजार करते रहे और अब अंतिम इच्छा यही है कि गांव तक सड़क पहुंच जाए, ताकि अंतिम यात्रा भी सम्मान के साथ सड़क मार्ग से हो सके।

यह मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि सरकारी घोषणाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। यदि मुख्यमंत्री की घोषणाएं वर्षों तक फाइलों में ही अटकी रहें, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल वही है, जिसका जवाब घिंघारुकोट का हर परिवार जानना चाहता है आखिर मुख्यमंत्री की घोषणा जमीन पर कब उतरेगी और गांव तक सड़क कब पहुंचेगी?

घिंघारुकोट सड़क एक नजर में
वर्ष 2024 में 4 किमी सड़क की घोषणा। करीब तीन साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं। मरीजों को आज भी डोली और कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक लाया जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोज दुर्गम पैदल रास्ते का सामना।ग्रामीण कई बार प्रशासन से लगा चुके हैं गुहार, समाधान अब भी अधूरा।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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