Inspiring News: चंपावत के विनोद ने मेहनत बोई, खुशहाली उगाई 

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चम्पावत, प्रेस 15 न्यूज। किस्मत बदलने के लिए हमेशा शहर की ओर कदम बढ़ाना जरूरी नहीं, कभी-कभी अपनी मिट्टी पर भरोसा करना ही सबसे बड़ा फैसला साबित होता है।

चम्पावत के बाराकोट विकासखंड के च्यूरानी गांव निवासी विनोद सिंह ने नौकरी की राह छोड़ अपनी पैतृक जमीन को ही भविष्य की उम्मीद बना लिया। आधुनिक तकनीक, मेहनत और वैज्ञानिक सोच के साथ उन्होंने 40 नाली भूमि पर ऐसा एकीकृत कृषि मॉडल तैयार किया है, जहां पॉलीहाउस, जल संचयन और जैविक खाद के सहारे खेती अब सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार पहाड़ों में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि-उद्यानिकी को बढ़ावा दे रही है। चम्पावत के बाराकोट विकासखंड के च्यूरानी गांव निवासी विनोद सिंह ने इसी सोच को अपनाते हुए अपनी पैतृक भूमि पर आधुनिक उद्यानिकी का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है।

एमए के साथ आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा प्राप्त विनोद सिंह ने पारंपरिक नौकरी की राह चुनने के बजाय गांव में रहकर खेती को ही रोजगार का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग और विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने करीब 40 नाली कृषि भूमि में संरक्षित और खुले वातावरण में एकीकृत खेती शुरू की।

विनोद ने खेत में आधुनिक पॉलीहाउस के साथ सिंचाई टैंक और जल संचयन की व्यवस्था की है। जैविक पोषण के लिए वर्मी कम्पोस्ट इकाई भी स्थापित की गई है। पॉलीहाउस में प्रतिकूल मौसम के बावजूद ऑफ सीजन सब्जियों की पौध और फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं खुले खेतों और ढलानदार भूमि पर पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली, फ्रेंच बीन्स, कद्दू, लौकी और खीरा जैसी फसलें उगाई जा रही हैं।

उनके फलोद्यान में आम, अमरूद और अनार के पौधे भी फल दे रहे हैं। वर्ष 2025-26 में विनोद सिंह ने 12 क्विंटल पत्तागोभी, 10 क्विंटल शिमला मिर्च, 10 क्विंटल आम, 10 क्विंटल अमरूद और 7 क्विंटल मूली का उत्पादन किया। विविध फसलों के कारण खेत से लगातार उत्पादन और आय का रास्ता बना है।

विनोद सिंह खेती में रासायनिक उर्वरकों के बजाय स्वयं तैयार वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करते हैं। इससे उत्पादन लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। उनका खेत आसपास के किसानों और युवाओं के लिए एक तरह की जीवंत पाठशाला बन गया है, जहां वे पॉलीहाउस प्रबंधन, जल संचयन और जैविक उद्यानिकी की तकनीक सीख रहे हैं।

विनोद सिंह का यह प्रयास पहाड़ों में खेती को केवल परंपरागत आजीविका के बजाय व्यावसायिक, रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक उदाहरण पेश करता है। उनका मॉडल स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ पलायन की चुनौती से निपटने की संभावनाएं भी दिखाता है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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