Inspiring News: जहां उम्मीद टूट रही थी, वहां इंसानियत खड़ी थी… बच गया रवीना का हाथ

खबर शेयर करें -

लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। कभी-कभी किसी की जिंदगी बचाने के लिए सिर्फ दवा और इलाज ही नहीं, बल्कि सही वक्त पर किसी का हाथ थामने वाला भी जरूरी होता है। बाराकोट के तड़ीगांव की 16 वर्षीय रवीना की कहानी कुछ ऐसी ही है।

मां-बाप का साया पहले ही सिर से उठ चुका है और वह अपनी नानी के साथ रह रही है। बीमारी के बीच परिवार इलाज के बजाय झाड़-फूंक में उलझा रहा और हालात इतने बिगड़ गए कि रवीना के हाथ की उंगलियां तक बर्फ जैसी ठंडी पड़ गईं।

Ad

रवीना को उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट लाया गया तो हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौहान ने उसकी हालत देखकर गंभीर खतरे की आशंका जताई।

डॉक्टर के अनुसार रवीना करीब एक माह पहले भी अस्पताल आई थी, लेकिन इसके बाद उपचार के लिए वापस नहीं आई। लगातार बढ़ती समस्या को देखते हुए डॉक्टर ने चेताया कि यदि समय रहते इलाज शुरू नहीं हुआ तो हाथ काटने तक की नौबत आ सकती है।

डॉक्टर की बात सुनकर रवीना और उसकी नानी घबरा गईं और अस्पताल से वापस घर जाने लगीं। यहीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी ने संवेदनशीलता दिखाई और बच्ची को यूं ही घर नहीं जाने दिया। उन्होंने परिजनों को समझाया, हिम्मत दी और दोबारा रवीना को अस्पताल पहुंचाया।

इसके बाद सचिन जोशी ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी और चिकित्सक डॉ. विराज राठी से बातचीत कर बच्ची के इलाज में सहयोग मांगा। जिलाधिकारी की ओर से भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने बच्ची का उपचार शुरू किया।

हार नहीं मानी, चार दिन बाद चेहरे पर लौट आई मुस्कान

रवीना की हालत गंभीर थी और उपचार भी चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद सचिन जोशी लगातार बच्ची और उसके परिवार के साथ खड़े रहे। वहीं डॉ. राजीव चौहान ने भी चुनौती स्वीकार करते हुए उपचार शुरू किया। चिकित्सकीय टीम की मेहनत रंग लाई और चार दिन बाद रवीना स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।

जब रवीना अस्पताल से बाहर निकली तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी और नानी की आंखों में राहत। जिस हाथ को बचाने को लेकर चिंता जताई जा रही थी, वही हाथ अब सुरक्षित था। इस पल ने उन सभी लोगों के चेहरों पर खुशी ला दी, जो इन चार दिनों में रवीना के साथ खड़े रहे। रवीना की मदद में पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी की भूमिका खास रही।

बताया गया कि वह इससे पहले भी जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं और अपने निजी खर्च पर मरीजों को हल्द्वानी, बरेली समेत अन्य अस्पतालों तक अपनी गाड़ी से उपचार के लिए पहुंचा चुके हैं। रवीना के मामले में भी उनकी जिद और संवेदनशीलता ने बच्ची को दोबारा अस्पताल की चौखट तक पहुंचाया।

वहीं डॉ. राजीव चौहान और चिकित्सकीय टीम ने समय रहते उपचार शुरू कर अपनी जिम्मेदारी निभाई। डॉक्टरों के प्रयासों से रवीना का हाथ बच सका और वह स्वस्थ होकर घर लौट पाई। सच ही कहा गया है कि डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। रवीना की कहानी सिर्फ एक बच्ची के इलाज की कहानी नहीं है।

यह इंसानियत, संवेदनशीलता और समय पर उठाए गए सही कदम की कहानी है। एक तरफ सचिन जोशी ने हार नहीं मानी और बच्ची को अस्पताल तक दोबारा पहुंचाया, तो दूसरी तरफ डॉक्टर राजीव चौहान ने अपनी विशेषज्ञता और हिम्मत से इलाज की कमान संभाली। दोनों के प्रयासों ने आखिरकार रवीना के चेहरे पर फिर से जिंदगी की मुस्कान लौटा दी।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0

Ad

संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

सम्बंधित खबरें