जिला सैनिक कल्याण अधिकारी की संवेदनशील पहल से निराश फौजी परिवार में लौटी खुशियां

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चंपावत, प्रेस 15 न्यूज। एक गरीब फौजी परिवार के लिए जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कर्नल उमेद सिंह की संवेदनशील पहल उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।

सैनिक मनीराम की मृत्यु के बाद पारिवारिक अभिलेखों में पत्नी और बच्चों का नाम दर्ज न होने के कारण अटकी फैमिली पेंशन का मामला अब काफी मशक्कत के बाद आगे बढ़ सका है। विभागीय स्तर पर लगातार पहल और आवश्यक जांच के बाद अब मनीराम की विधवा को फैमिली पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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मनीराम सेना में भर्ती होने के बाद रंगरूट अवस्था में ही मेडिकल बोर्ड द्वारा सेवामुक्त कर घर भेज दिए गए थे। बाद में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु से करीब एक माह पहले कैंसर से पीड़ित मनीराम जिला सैनिक कल्याण कार्यालय पहुंचे थे। उनके प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कर्नल उमेद सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू कराई।

जांच के दौरान सामने आया कि मनीराम ने सेना के अभिलेखों में अपनी पत्नी और बच्चों के नाम दर्ज नहीं कराए थे। पारिवारिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी। उनकी पहली पत्नी नारायणी देवी से कोई संतान नहीं थी। इसके बाद आपसी सहमति से उन्होंने अपनी साली को भी अपने साथ घर में रखा।

बाद में दोनों महिलाओं से मनीराम के बच्चे हुए। इसी पारिवारिक स्थिति और सेना के अभिलेखों में आवश्यक जानकारी दर्ज नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन का मामला उलझ गया।

ऐसे कठिन मामले में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह ने लगातार पहल करते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ाई। जांच और आवश्यक प्रक्रिया के दौरान यह भी सामने आया कि मनीराम की साली को अपनी दीदी नारायणी देवी को पेंशन दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

दोनों परिवार एक ही घर में साथ रहते हैं। इस सहमति और विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद अब मनीराम की विधवा को फैमिली पेंशन मिलने की राह खुल गई है।

अभिलेखों में परिवार की जानकारी अपडेट रखना जरूरी

जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कर्नल उमेद सिंह ने कहा कि प्रत्येक सैनिक को सेना के अभिलेखों में अपने परिवार से संबंधित जानकारी समय-समय पर अपडेट रखनी चाहिए। ऐसा न होने पर सैनिक की मृत्यु के बाद उसके आश्रितों को पेंशन सहित अन्य अधिकार प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

कर्नल उमेद सिंह की पहल से लंबे समय से उलझे इस मामले में रास्ता निकलने से मनीराम के परिवार में राहत और खुशी का माहौल है। मामला यह भी बताता है कि सैनिक जीवन में परिवार से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों को अद्यतन रखना कितना महत्वपूर्ण है।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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