5 लाख+ हरियाली के करीब पहुंचने वाला है जुनून, पौधे मुफ्त बांटते हैं, बदले में मांगते हैं सिर्फ जमीन… सैल्यूट डॉ. पंत

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प लेकर डॉ. आशुतोष पंत वर्षों से लगातार पौधारोपण और पौधभेंट के अभियान में जुटे हैं। पिछले 38 वर्षों में डॉ. पंत करीब चार लाख 65 हजार पौधे उत्तराखंड की धरती पर रोपित कर चुके हैं। इस साल 30 सितंबर तक 35 हजार और पौधे लगाने के मिशन पर हैं।

खास बात यह है कि उनका यह अभियान किसी सरकारी सहायता के भरोसे नहीं, बल्कि अपने संसाधनों, मेहनत और पर्यावरण के प्रति जुनून से आगे बढ़ रहा है। वह लोगों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराते हैं और बदले में सिर्फ इतनी उम्मीद रखते हैं कि उनके पास पौधा लगाने के लिए जमीन हो और उसे पेड़ बनने तक पालने का संकल्प भी।

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अपने पिता से मिले संस्कारों को पर्यावरण संरक्षण के इस मिशन से जोड़ते हुए डॉ. पंत अब तक लाखों पौधों को धरती में रोपने और लोगों को पौधे उपलब्ध कराने का काम कर चुके हैं। उनके लिए पौधारोपण महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है।

इसी अभियान की 98वीं श्रृंखला के तहत 12 सितंबर 2026 को नैनीताल जिले में भुजियाघाट के समीप स्थित आयुर्वेद कॉलेज परिसर में औषधीय पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही नजदीकी सूर्याजाला गांव के ग्रामीणों को फलों के पौधे निशुल्क भेंट किए गए। कॉलेज के निदेशक अशोक पाल और प्रधानाचार्य डॉ. विनय खुल्लर के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

इससे पहले 8 सितंबर को काठगोदाम के शीशमहल स्थित रामलीला मैदान में आयोजित हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में भी डॉ. पंत ने भक्तों को पौधे भेंट किए थे। प्रत्येक मंगलवार यहां हनुमान चालीसा का संगीतमय पाठ किया जाता है। समाजसेवी पंकज खत्री वर्षों से यहां धर्मजागरण कार्यक्रम चला रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी आनंदी नेगी के आग्रह पर पंकज खत्री ने डॉ. पंत से संपर्क कर भक्तों के लिए पौधे उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

कार्यक्रम में 400 से अधिक लोग शामिल हुए। हनुमान चालीसा के संगीतमय पाठ के बाद भक्तों को उनकी पसंद के अनुसार कटहल, अमरूद और तेजपत्ता के पौधे भेंट किए गए। डॉ. पंत ने जनसमूह से पॉलीथीन का प्रयोग रोकने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की। लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।

डॉ. पंत ने कहा कि यदि औसत आयु 60 वर्ष मानें तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की भरपाई के लिए कम से कम 46 बड़े पेड़ लगाने चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति हर साल दो पेड़ लगाए और उन्हें बड़ा होने तक देखभाल करे तो धरती के प्रति अपना दायित्व निभाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। आने वाली पीढ़ियों को पर्याप्त प्राणवायु, पानी और संतुलित तापमान उपलब्ध कराने के लिए पेड़ लगाना जरूरी है।

उनका पौधभेंट अभियान केवल नैनीताल तक सीमित नहीं है। इससे पहले हरिद्वार के गेंदीखाता, नए राजकीय मेडिकल कॉलेज, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज और बहादराबाद में पौधभेंट एवं पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित किए गए। देहरादून के दुधली गांव और भारतीय चिकित्सा परिषद के परिसर में भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम हुए।

डॉ. पंत के अनुसार, बरसात के मौसम में होने वाला पौधारोपण अब अंतिम चरण में है, लेकिन उनके पास अभी भी च्यूरा समेत विभिन्न प्रजातियों के काफी पौधे उपलब्ध हैं। ढाई हजार से पांच हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में च्यूरा आसानी से उगाया जा सकता है। वह इच्छुक ग्रामीणों को च्यूरा सहित अन्य पौधे निशुल्क उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।

आयुर्वेद कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की मूल आधारशिला वनस्पतियां हैं, लेकिन अनियंत्रित दोहन और अन्य पर्यावरणीय कारणों से कई औषधीय पादप विलुप्ति की कगार पर हैं। ऐसे पौधों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने उत्तराखंड के पारंपरिक और उपयोगी वृक्ष च्यूरा के संरक्षण की मुहिम का भी उल्लेख किया। कभी पहाड़ों में बहुतायत में पाए जाने वाले च्यूरा के पत्ते चारे और पत्तल के लिए तथा फल खाद्य उपयोग में आते थे। इसके बीजों से निकलने वाला घी भी उपयोगी माना जाता है। लकड़ी के लिए बड़े पैमाने पर कटान के कारण इसकी संख्या में भारी कमी आई है। इसी वजह से डॉ. पंत पिछले वर्ष से लोगों को च्यूरा लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से पॉलीथीन के प्रयोग से बचने और हर वर्ष कम से कम दो पेड़ लगाने के साथ उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। उनका संदेश साफ है पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे पेड़ बनाना असली पर्यावरण सेवा है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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