
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। यह खबर सिर्फ एक चुनावी विवाद की नहीं, बल्कि सच और झूठ, ईमानदारी और छल के बीच लड़ी गई उस कानूनी लड़ाई की कहानी है, जिसमें आखिरकार सत्य की जीत हुई। वार्ड नंबर 9 की जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की पवित्रता के लिए डेढ़ वर्ष तक अदालत की चौखट पर डटे रहने वाले गिरीश नैनवाल इस संघर्ष के वास्तविक नायक बनकर उभरे हैं।
असत्य पर सत्य की जीत : गिरीश नैनवाल के संघर्ष ने दिलाया वार्ड-9 की जनता को न्याय
नैनीताल जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड संख्या-9 तल्ली बमौरी के पार्षद राजेंद्र सिंह जीना के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब इस वार्ड में तीन माह के भीतर पुनः चुनाव होंगे। इतना ही नहीं, राजेंद्र सिंह जीना अब इस चुनाव में प्रत्याशी भी नहीं बन सकेंगे।
हल्द्वानी में 23 जनवरी 2025 के दिन नगर निगम चुनाव सम्पन्न हुए थे। करीब डेढ़ वर्ष के लंबे इंतजार के बाद हुए इन चुनावों में सभी दावेदार पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरे थे।
वार्ड संख्या-9 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी गिरीश नैनवाल मैदान में थे, जबकि कांग्रेस पृष्ठभूमि के राजेंद्र सिंह जीना और जितेंद्र जोशी भी चुनावी मुकाबले में शामिल थे।
आरोप है कि राजेंद्र सिंह जीना ने नामांकन पत्र में अपने विरुद्ध दर्ज आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाई और स्वच्छ छवि का प्रचार करते हुए जनता के बीच पहुंचे। परिणाम उनके पक्ष में आया और 25 जनवरी 2025 को निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें निर्वाचित घोषित कर दिया।
काठगोदाम-हल्द्वानी नगर निगम के 25 जनवरी 2025 को घोषित परिणाम के अनुसार तल्ली बमौरी वार्ड नौ से राजेंद्र सिंह जीना को 836, निकटतम प्रतिद्वंद्वी गिरीश नैनवाल को 771 व तीसरे प्रत्याशी जितेंद्र जोशी को 111 मत मिले थे।
ऐसे में गिरीश नैनवाल ने छलकपट से मिली हार स्वीकार करने के बजाय लोकतंत्र और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना। उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और करीब एक वर्ष पांच महीने तक लगातार संघर्ष किया।
अंततः जिला न्यायाधीश माननीय प्रशांत जोशी की अदालत ने राजेंद्र सिंह जीना के निर्वाचन को अवैध करार देते हुए सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। कोर्ट ने नामांकन पत्र के साथ आपराधिक मुकदमों की जानकारी नहीं देने को भ्रष्ट आचरण करार दिया है।
साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी को तीन माह के भीतर वार्ड नौ में पुनः चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजेंद्र सिंह जीना के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई गई है।
कोर्ट ने यह भी निर्णय दिया है कि आगामी चुनाव में प्रत्याशियों को निर्वाचन प्रपत्रों के साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने पर आवश्यक रूप से उल्लेख करना होगा। निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इसका परीक्षण कर विधि सम्मत निर्णय करेंगे।
अदालत के आदेश के बाद भावुक हुए गिरीश नैनवाल ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज वार्ड-9 की जनता के साथ न्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि राजेंद्र सिंह जीना ने अपने आपराधिक मामलों को छिपाकर भोली-भाली जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया, लेकिन आखिरकार सच सामने आ ही गया। उन्होंने कहा कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं।
गिरीश नैनवाल ने कहा कि वह हमेशा 24×7 वार्ड की जनता के सुख-दुख में शामिल रहे हैं और आगे भी सम्मानित जनता के बीच जाकर वार्ड के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करते रहेंगे।
यह फैसला केवल एक पार्षद का निर्वाचन निरस्त होने भर का मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की एक महत्वपूर्ण मिसाल भी है। यदि गिरीश नैनवाल हिम्मत हार जाते, यदि वे कानूनी लड़ाई लड़ने का साहस नहीं जुटाते, तो शायद यह सच कभी सामने नहीं आता। उनका धैर्य, ईमानदारी और न्याय के प्रति अटूट विश्वास आज वार्ड-9 की जनता के सम्मान की जीत बनकर सामने आया है।
कुल मिलाकर यह फैसला असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और छल पर ईमानदारी की जीत के रूप में देखा जा रहा है। वार्ड-9 की जनता को भ्रम में रखकर जीता गया चुनाव अंततः न्याय की कसौटी पर टिक नहीं पाया।
यह निर्णय भविष्य के चुनावों के लिए भी एक नजीर बनेगा कि लोकतंत्र में जनता के विश्वास के साथ छल करने वालों को देर-सवेर जवाब देना ही पड़ता है।









