
बागेश्वर, प्रेस 15 न्यूज। ईमानदारी ने एक बार फिर भ्रष्टाचार को बेनकाब कर दिया। बागेश्वर में सोलर प्लांट की फाइलें आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांग रहे उरेडा के परियोजना अधिकारी का खेल उस समय खत्म हो गया, जब शिकायतकर्ता ने पैसे देने के बजाय विजिलेंस का दरवाजा खटखटाया।
विजिलेंस ने जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है.
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस कड़ी में बागेश्वर जिले में उरेडा (UREDA) के परियोजना अधिकारी धीरेंद्र सिंह पटवाल को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
बागेश्वर। विजिलेंस हल्द्वानी सेक्टर की टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए उरेडा के परियोजना अधिकारी धीरेंद्र सिंह पटवाल को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी पर सोलर प्लांट की निरीक्षण रिपोर्ट आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप था।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने हल्द्वानी सेक्टर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके सोलर प्लांटों की संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट लंबे समय से उरेडा कार्यालय में लंबित पड़ी है। आरोप था कि परियोजना अधिकारी धीरेंद्र सिंह पटवाल प्रत्येक फाइल को आगे बढ़ाने के लिए 10 से 15 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। शिकायतकर्ता की चार फाइलें अटकी होने के कारण आरोपी ने कुल 40 हजार रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता रिश्वत देने के बजाय भ्रष्ट अधिकारी को कानून के शिकंजे में लाना चाहता था। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी के निर्देश पर निरीक्षक के नेतृत्व में ट्रैप टीम गठित की गई।
शुक्रवार को योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत विजिलेंस टीम ने उरेडा कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी अधिकारी धीरेंद्र सिंह पटवाल (निवासी पीरूमदारा, रामनगर, जनपद नैनीताल) को 40 हजार रुपये की रिश्वत सौंपी, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।









