
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। रक्षाबंधन का पावन पर्व नजदीक आते ही हल्द्वानी की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
‘रेशम नई पहल’ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस बार अपने हाथों से तैयार की गई खूबसूरत रेशम की राखियों के जरिए न केवल भाई-बहन के स्नेह को नई पहचान दे रही हैं, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।
समूह से जुड़ी कविता ऐरी, किरण जोशी, स्मृति आर्या और अन्नू राणा बड़े धैर्य और बारीकी के साथ आकर्षक रेशम की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में रंगों की खूबसूरती के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प साफ दिखाई देता है।
महिलाओं का कहना है कि उनकी कोशिश केवल राखियां बेचना नहीं, बल्कि लोगों को ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से जोड़ना भी है।
उनका मानना है कि यदि लोग बाजार में उपलब्ध मशीन से बनी राखियों के बजाय स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियां खरीदेंगे, तो इससे स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ेगी, महिलाओं को रोजगार मिलेगा और प्रदेश की पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान मिलेगी।
रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर स्थानीय उत्पादों को अपनाना केवल खरीदारी नहीं, बल्कि प्रदेश की मेहनतकश महिलाओं के सपनों और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को मजबूती देने का भी माध्यम है।
‘रेशम नई पहल’ स्वयं सहायता समूह ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि इस रक्षाबंधन स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार रेशम की हस्तनिर्मित राखियां खरीदकर ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।
रेशम विभाग के कुमाऊं मंडल के उप निदेशक हेम चंद्र ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं रेशम उत्पादों के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तकला को भी नई पहचान दिला रही हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा अवसर हैं। यदि लोग स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित रेशम की राखियां खरीदेंगे, तो इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी, नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस रक्षाबंधन स्थानीय हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता देकर महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के अभियान में सहभागी बनें।









