
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। देशभर में पेपर लीक के खिलाफ उठ रहे विरोध के बीच उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) भी बड़े परीक्षा घोटाले की चपेट में आ गया है।
विश्वविद्यालय की दो सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवि प्रशासन ने दोनों परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। इस फैसले से विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल के अनुसार, ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ और ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषयों के प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत मिली थी।
कुलपति के निर्देश पर गठित जांच समिति और संबंधित संस्थान की आंतरिक जांच में यह सामने आया कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून के सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने प्रश्नपत्र छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन पोर्टल पर साझा किए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने दोनों परीक्षाएं निरस्त करते हुए आरोपी सहायक प्रोफेसर पर अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को परीक्षा की गोपनीयता और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने पर कड़ी चेतावनी भी जारी की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि रद्द की गई दोनों परीक्षाएं अब अगस्त के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी। नई परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की सूची जल्द ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
इन 12 संस्थानों के छात्रों पर पड़ा असर
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज, भीमताल
तुलाज इंस्टीट्यूट, देहरादून
बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान, द्वाराहाट
रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून
जयराम भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून
माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून
बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून
टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, टिहरी
नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान, पिथौरागढ़
वूमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून
इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोपेश्वर
पेपर लीक की इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









