
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। धरती पर भगवान का रूप माने जाने वाले डॉक्टर जब सेवा को ही अपना धर्म बना लें, तो समाज उन्हें दिल से सम्मान देता है। डॉ. त्रिभुवन दत्त शर्मा ऐसे ही एक नाम हैं, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
जिस दौर में हल्द्वानी में एक डॉक्टर का पर्चा 500 रुपये जैसे सामान्य हो गया है, उस समय में वे किसी भगवान से कम नहीं हैं। यही वजह है कि गरीब से लेकर हर वर्ग का व्यक्ति उनके पास इलाज के लिए पहुंचता है।
गुरुवार को हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रेक्षागृह में आयोजित वरिष्ठ नागरिक सम्मान एवं खेल समारोह-2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा डॉ. त्रिभुवन दत्त शर्मा को उनके उत्कृष्ट सामाजिक और चिकित्सा योगदान के लिए सम्मानित किया।
4 सितंबर 1954 को माता शारदा देवी और पिता हरिदत्त शर्मा के घर जन्मे डॉ. शर्मा ने बचपन से ही चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया। कानपुर विश्वविद्यालय से बीएएमएस करने के बाद वर्ष 1981 से उन्होंने कुसुमखेड़ा के ग्रामीण क्षेत्र में क्लिनिक खोलकर चिकित्सा सेवा शुरू की।
डॉ. शर्मा की सबसे बड़ी पहचान उनकी सेवा भावना है। उन्होंने हमेशा मरीज के इलाज को प्राथमिकता दी और कभी भी पैसों को महत्व नहीं दिया। पिछले 40 वर्षों से वे बेहद कम शुल्क पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जो आज के समय में एक मिसाल है।
कोरोना काल में भी उनका समर्पण साफ नजर आया। जब कई जगह स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित थीं, तब उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ मरीजों का इलाज किया। इस दौरान वे खुद भी संक्रमण की चपेट में आ गए, लेकिन स्वस्थ होकर फिर से सेवा में जुट गए।
एचएन इंटर कॉलेज के सेवानिवृत और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक विपिन चंद्र पांडे बताते हैं कि डॉ. शर्मा को बीमारी की सटीक पहचान (डायग्नोसिस) में विशेष दक्षता हासिल है। वे इलाज के साथ-साथ मरीजों को सही सलाह देकर बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। इस दौर में भी डॉ. शर्मा महज 10 रुपए की फीस में इलाज देते हैं। इससे उनकी महानता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आज क्षेत्र में लोग उन्हें “गरीबों के मसीहा” और सेवा के प्रतीक के रूप में देखते हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची नीयत और समर्पण से किया गया कार्य ही व्यक्ति को समाज में सबसे ऊंचा स्थान दिलाता है।









