
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। एक मां की आंखों में नींद नहीं है… वह दरवाजे की आहट पर बार-बार चौंक जाती है। एक पिता हर अनजान फोन कॉल से डरता है, कहीं फिर से कोई बुरी खबर न हो।
ये किसी एक घर की कहानी नहीं, बल्कि हल्द्वानी के उन बेहिसाब परिवारों की सच्चाई है, जिनके बच्चे बेटा-बेटी नशे की गिरफ्त में हैं या उस खतरनाक कगार पर खड़े हैं, जहां से लौटना आसान नहीं होता।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये जहर बच्चों तक पहुंच कैसे रहा है? जवाब उतना ही डराने वाला है- बहुत आसानी से। बिलासपुर, बरेली, बहेड़ी जैसे शहरों से नशे की खेप बिना किसी बड़े अवरोध के लंबे समय से हल्द्वानी पहुंच रही है। यहां से ये जहर नैनीताल और पूरे पहाड़ी इलाकों में फैल रहा है, जैसे किसी ने इस शहर को नशे का खुला गलियारा बना दिया हो।
हाल ही की घटनाएं इस सच्चाई को और भी गहरा करती हैं। आज रामपुर रोड स्थित बेलबाबा मंदिर के पास से पुलिस ने कनिका (40 वर्ष), पत्नी विजय निवासी शिवनगर ट्रांजिट कैम्प, जिला ऊधम सिंह नगर को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 203 ग्राम स्मैक बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 60 लाख 90 हजार रुपए आंकी जा रही है।
यहां बताते चलें कि मामूली अपराध में आरोपी का सरनेम और उसके पिता और पति का पूरा नाम बताने वाली पुलिस ने इस बार आरोपी महिला और उसके पति का सिर्फ नाम प्रेसनोट में जाहिर किया है। ऐसा क्यों किया गया, इसका जवाब तो जिले के कप्तान डॉ. मंजूनाथ टीसी ही दे सकते हैं। क्योंकि यह पहला वाकया नहीं है जब स्मैक जैसे गंभीर मामलों पुलिस ने ऐसा किया हो। खैर…..

इससे पहले बीते सोमवार को बागजला, गौलापार क्षेत्र से 91.10 ग्राम स्मैक (लगभग 27 लाख रुपये) के साथ आनंद सिंह रावत और रोहित थापा को पकड़ा गया था। पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया था कि वे स्मैक को पिंचू निवासी शक्तिफार्म, सितारगंज (उधम सिंह नगर) से खरीदकर हल्द्वानी में सप्लाई करते थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि सप्लाई की जड़ें बाहरी इलाकों तक फैली हुई हैं, जहां से यह जहर खरीदकर हल्द्वानी लाया जाता है और फिर यहां से छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बाजार में उतारा जाता है।
लेकिन इन आंकड़ों और बरामदगियों के पीछे जो असली दर्द छुपा है, वो किसी रिपोर्ट में नहीं दिखता। वो दर्द है उन मां-बाप का, जो हर दिन अपने बच्चों को इस दलदल से बाहर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ सफल हो जाते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिनके हाथ सिर्फ निराशा लगती है।
हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में फलफूल रहे नशा मुक्ति केंद्र इस बात को चीख चीखकर बताने के लिए काफी हैं कि आज कैसे नई पीढ़ी नशे के दलदल में धंस रही है। और पीछे मां बाप उनकी चिंता में खून के आंसू बहाने को मजबूर हैं।
नशा सिर्फ एक अपराध नहीं है ये एक ऐसी चुपचाप फैलने वाली त्रासदी है, जो परिवारों को अंदर से तोड़ देती है। हल्द्वानी आज उसी मोड़ पर खड़ा है, जहां अगर समय रहते इस जाल को नहीं तोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाएगी।
सवाल सिर्फ ये नहीं कि कितनी स्मैक पकड़ी गई सवाल ये है कि कितनी अब भी शहर में घूम रही है, और कितने घरों को अभी और उजाड़ना बाकी है। क्योंकि नशे का हर तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ रहा हो, ऐसा दावा सामने नहीं आया है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
देखिए वीडियो👇🔴
इससे पहले नैनीताल जिले में अपनी कार्यशैली से विवादों में रहे एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने तो अपना एक वीडियो वायरल कर खूब सुर्खियां बटोरी थी। जिसमें वो अपने ही अधीनस्थ थाना, चौकी प्रभारियों और सीओ को कहते नजर आए थे कि तुम्हारी आत्मा भले मर चुकी हो लेकिन फिलहाल नशे की खिलाफ उनकी आत्मा नहीं मरी है। क्यों नहीं तस्करों के खिलाफ एक्शन नहीं लेते?
हालाकि तत्कालीन एसएसपी मीणा का वह वायरल वीडियो महज व्यूज और सुर्खियां पाने तक ही सीमित रहा। जिले में नशा तस्करों के हौंसले बदस्तूर जारी रहे।









