सिर्फ वेतन नहीं, सम्मान और अधिकार की लड़ाई: दमन का देंगे लोकतांत्रिक जवाब

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मजदूर आंदोलन ने तेज़ रफ्तार पकड़ ली है। गुरुग्राम के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र से शुरू हुई ठेका मजदूरों की हड़ताल अब नोएडा, फरीदाबाद, पानीपत और भिवाड़ी तक फैलकर एक व्यापक श्रमिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।

इस बीच इंकलाबी मजदूर केंद्र के पदाधिकारियों ने आज हल्द्वानी के सत्यनारायण मंदिर धर्मशाला प्रेसवार्ता की।

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आरोप लगाया है कि मजदूरों और उनके संगठनों के कार्यकर्ताओं को साजिशन फर्जी और संगीन मुकदमों में फंसाकर आंदोलन को कुचलने की कोशिश की जा रही है।

इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला ने कहा है कि 2 अप्रैल से होंडा कंपनी के ठेका मज दूरों द्वारा शुरू की गई हड़ताल धीरे-धीरे कई बड़ी कंपनियों मुंजाल शोवा, सत्यम ऑटो, रूप पॉलिमर्स, मॉडलामा, रिचको, रिचा ग्लोबल, प्रिकोल, फोर्जा, सरिता हांडा और सिरमा एसजीएस तक फैल गई। मज़दूरों की मुख्य मांग वेतन वृद्धि और ओवरटाइम का कानूनन दोगुना भुगतान है।

उन्होंने मौजूदा न्यूनतम वेतन को “भुखमरी वेतन” करार देते हुए कहा कि न केवल यह अपर्याप्त है, बल्कि कई स्थानों पर इसका भी पालन नहीं किया जा रहा। ओवरटाइम का भुगतान नियमों के विपरीत किया जा रहा है और स्थायी कार्यों में ठेका प्रथा के जरिए श्रमिकों का शोषण आम बात हो चुकी है। आरोप लगाया गया कि सरकार और श्रम विभाग इन अनियमितताओं से वाकिफ होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे।

मजदूर संगठनों के मुताबिक, हरियाणा में पिछले 10 वर्षों से वेतनमान संशोधित नहीं हुआ था। 2025 में 23,196 रुपये न्यूनतम वेतन पर सहमति बनने के बावजूद सरकार ने मार्च 2026 में 15,220 रुपये घोषित कर दिया, जिससे असंतोष और बढ़ गया। महंगाई और बढ़ती जीवन लागत ने हालात और गंभीर कर दिए, जिसके बाद मज़दूर सड़कों पर उतर आए।

इंकलाबी मजदूर केंद्र ने 9 अप्रैल की घटना को लेकर पुलिस-प्रशासन और कुछ कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बयान में कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर भाड़े के लोगों से तोड़फोड़ और आगजनी कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मज़दूर घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

पुलिस ने 56 मजदूरों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 महिलाएं बताई गई हैं, और कई धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।

संगठन ने आरोप लगाया कि उसके कई कार्यकर्ताओं श्यामबीर, अजीत, पिंटू यादव, हरीश, राजू और आकाश को साजिशकर्ता बताकर गिरफ्तार किया गया और गंभीर धाराएं लगाकर जेल भेज दिया गया। संगठन का कहना है कि पहले भी इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, लेकिन कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला था।

साथ ही मीडिया ट्रायल और “मनगढ़ंत आरोपों” के जरिए माहौल बनाने का भी आरोप लगाया गया है।

बयान में कहा गया कि मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं को “बाहरी तत्व” बताकर बदनाम किया जा रहा है, जबकि वे लंबे समय से श्रमिकों के बीच काम कर रहे हैं। संगठन ने इसे मजदूर आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति बताया।

इंकलाबी मज़दूर केंद्र ने देशभर के मज़दूर, किसान, छात्र, युवा और महिला संगठनों से एकजुट होकर इस “दमनात्मक कार्रवाई” का विरोध करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि वर्तमान हालात में व्यापक संघर्ष ही न्याय दिला सकता है।

प्रमुख मांगें

गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई और सभी मुकदमों की वापसी।

9 अप्रैल की घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच।

घायल मज़दूरों का सरकारी खर्च पर इलाज और मुआवजा।

नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) को रद्द किया जाए।

ठेका प्रथा खत्म कर स्थायी नियुक्ति दी जाए।

न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।

महिला मजदूरों से नाइट शिफ्ट में काम कराने का कानून समाप्त किया जाए।

इंकलाबी मजदूर केंद्र के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वेतन का नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और न्याय का है, जिसे दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। प्रेसवार्ता में साहब सिंह, सुरेंद्र रावत, महासचिव रोहित रूहेला, डीए रावत, मोहन मटियाली आदि रहे।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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