
हल्द्वानी/खटीमा, प्रेस 15 न्यूज। मेरी कलम को खामोश करने की साजिशें, झूठ के प्रपंच से मुझे मिटाने की कोशिशें, क्या सोचते हो तुम सफल होंगी? बेबाक हूं.. ये जान लो बेबाक ही मरूंगा, मेरी कलम जब तक चलेगी, मैं इंकलाब ही लिखूंगा, क्योंकि मेरी जैसी शख्सियत कभी झुकती नहीं, बेशक मिट जाया करती है। इस धरती पर जब तक है, जिंदा नजर आया करती है… ये पंक्तियां पत्रकार दीपक फुलेरा के जनहित के जुनून और जज्बे को बताने के लिए काफी हैं जिसे डराने और परेशान करने के लिए सिस्टम ने मुकदमा थोपने में देर नहीं लगाई। लेकिन यही बड़ी भूल साबित हुई। आज पत्रकार दीपक फुलेरा को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड के पत्रकार एकजुट हैं।
खटीमा के वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा पर गैस किल्लत से जुड़े समाचार प्रसारण के चलते दर्ज मुकदमे के विरोध में आज हल्द्वानी में पत्रकारों का गुस्सा खुलकर सामने आया।
हिमालय डिजिटल मीडिया संगठन के बैनर तले पत्रकारों ने एकजुट होकर अपर निदेशक, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग आशीष त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा और मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की।
पत्रकारों ने साफ कहा कि दीपक फुलेरा ने गैस किल्लत जैसी गंभीर जनसमस्या को प्रमुखता से उठाया था। यह खबर किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की परेशानी को सामने लाने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रसारित की गई थी। ऐसे में इस पर मुकदमा दर्ज करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला भी है।
ज्ञापन में कहा गया कि यदि जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने पर ही पत्रकारों को मुकदमों का सामना करना पड़ेगा, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने जैसा होगा। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई से सच सामने लाने का साहस रखने वाले पत्रकारों का मनोबल टूटेगा, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि जनसमस्याओं को उजागर करना अपराध नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दीपक फुलेरा पर दर्ज मुकदमा तुरंत वापस लिया जाए और भविष्य में पत्रकारों के साथ इस प्रकार का दमनकारी रवैया न अपनाया जाए।
इस दौरान गिरीश गोस्वामी, शैलेंद्र नेगी, अंकित शाह, हर्ष रावत, दिनेश पांडे, संजय प्रसाद, गितेश त्रिपाठी, संजय पाठक, दीप बिष्ट बाबा, श्रुति तिवारी, विनोद यादव समेत दर्जनों पत्रकार मौजूद रहे। पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।









