खबर दिखाई तो खटक गई सच्चाई…हल्द्वानी में स्वतंत्र पत्रकारिता को खामोश करने की कोशिश

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। जब पत्रकारिता सच दिखाती है, तो अक्सर सच से असहज लोग उसे दबाने की कोशिश करते हैं। हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित पंचायत घर इलाके में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां एक खबर ने व्यवस्था नहीं, बल्कि अहंकार को हिला दिया।

माउंट लीटेरा जी स्कूल के संचालक गिरजेश पांडे की मनमानी को जब “प्रेस 15 न्यूज” ने उजागर किया, तो जवाब में सुधार नहीं, बल्कि दबाव और मुकदमेबाजी का रास्ता चुना गया। पहले कानूनी नोटिस और अब एसीजेएम कोर्ट में संपादक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक केस, यह घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

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दरअसल, न्यू आदर्श कॉलोनी के दर्जनों परिवारों ने शिकायत की थी कि उनके वर्षों पुराने पारंपरिक रास्ते को स्कूल प्रबंधन ने दो गेट लगाकर बाधित कर दिया। रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई। गैस सिलेंडर से लेकर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी तक अंदर नहीं पहुंच पा रही थी। लोगों को मजबूरी में गेट खोलने-बंद करने का झंझट झेलना पड़ रहा था।

देखें वीडियो: माउंट लीटेरा जी स्कूल संचालक के मनमानी वाले गेट टूटे👇👇

मामला जब कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत तक पहुंचा, तो उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए अवैध गेट हटाए जाएं और लोगों के आवागमन में कोई बाधा न हो। आयुक्त ने घरों के आगे दायरे से बाहर बने रैंप हटाने को भी कहा। जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की, 31 मार्च 2026 को माउंट लीटेरा जी स्कूल के दोनों अवैध गेट हटा दिए गए, और लोगों ने राहत की सांस ली।

यहीं से कहानी बदलती है। जब इस पूरी घटना को “प्रेस 15 न्यूज” ने जनहित में सामने रखा, तो खबर से असहज होकर स्कूल संचालक ने पत्रकारिता पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। क्या एक खबर दिखाना, वो भी प्रशासनिक आदेशों और जनता की शिकायतों के आधार पर, अपराध हो गया?

और यह सवाल सिर्फ एक मीडिया संस्थान का नहीं है यह हर उस आवाज का है जो सच बोलने की हिम्मत रखती है। सोशल मीडिया पर प्रेस 15 न्यूज की खबर के कमेंट बॉक्स में आपत्तिजनक टिप्पणियां और धमकी भरे लहजे क्या यह नहीं दिखाते कि सच को स्वीकार करने के बजाय उसे दबाने की मानसिकता कितनी गहरी हो चुकी है?

यह भी पढ़ें: हल्द्वानी: रामपुर रोड के Mount Litera Zee School की मनमानी पर चला आयुक्त दीपक रावत का चाबुक

क्या अब हालात ऐसे हो गए हैं कि रसूखदारों के खिलाफ खबर दिखाना जोखिम बन जाए?

आम जनता की परेशानी को उजागर करना “गलती” कहलाए? और पत्रकारों को नोटिस और मुकदमों से डराकर चुप कराने की कोशिश सामान्य बात हो जाए?

सवाल कई हैं, जवाब कम। लेकिन एक सच साफ है अगर आज पत्रकारिता डर गई, तो कल आम आदमी की आवाज भी खामोश हो जाएगी।

“प्रेस 15 न्यूज” ने जो किया, वह पत्रकारिता का मूल धर्म है सत्ता नहीं, सच के साथ खड़ा होना। और यह संकल्प आगे भी जारी रहेगा चाहे सामने कितना भी दबाव क्यों न हो। क्योंकि सवाल पूछना अपराध नहीं, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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