
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। “जो कुर्सी से नहीं, कर्म से अपनी पहचान बनाते हैं, वही लोगों के दिलों में भरोसे के दीप जलाते हैं।” यह पंक्तियां उस समय साकार होती दिखीं, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अपर सचिव, सूचना विभाग के महानिदेशक एवं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी कार्यालय जाते समय सड़क डिवाइडरों पर चल रहे पौधरोपण अभियान को देखकर अपना वाहन रुकवाकर सीधे मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, बल्कि कर्मचारियों के साथ स्वयं पौधरोपण कर यह संदेश भी दिया कि प्रशासन की असली पहचान फाइलों से नहीं, बल्कि धरातल पर किए गए कार्यों से बनती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अपर सचिव, सूचना विभाग के महानिदेशक एवं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी एक बार फिर अपनी जमीनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं।
गुरुवार को कार्यालय जाते समय सड़क डिवाइडरों पर चल रहे पौधरोपण अभियान पर उनकी नजर पड़ी तो उन्होंने तत्काल अपना वाहन रुकवाया और बिना किसी औपचारिकता के सीधे निरीक्षण स्थल पर पहुंच गए।
उन्होंने पौधों की गुणवत्ता, सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी लेने के बाद उन्होंने स्वयं भी फावड़ा उठाकर पौधरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
आईएएस बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधरोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का माध्यम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जाए, क्योंकि किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता पौधे लगाने में नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने में है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “हरित उत्तराखंड” विजन के तहत एमडीडीए ने इस वर्ष देहरादून में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शहर के प्रमुख मार्गों, सड़क डिवाइडरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। साथ ही लगाए गए पौधों के संरक्षण और नियमित रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि आईएएस बंशीधर तिवारी इससे पहले भी कई मौकों पर अपनी कार्यशैली से लोगों का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। कभी पहाड़ के नौले-धारों तक पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना, कभी गांवों में चौपाल लगाकर आमजन की समस्याएं सुनना और उनके समाधान के लिए मौके पर अधिकारियों को निर्देश देना, उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
यही वजह है कि उन्हें ऐसा प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है, जो केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्वयं मैदान में उतरता है।
सड़क किनारे चल रहे पौधरोपण अभियान के बीच उनका अचानक पहुंचना एक बार फिर यही संदेश देता है कि प्रशासन की प्रभावशीलता केवल आदेश देने में नहीं, बल्कि धरातल पर उसकी निगरानी और जनहित के प्रति संवेदनशीलता में निहित है। यही कार्यशैली उन्हें आम प्रशासनिक अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है।








