इंसानियत अभी जिंदा है… समाज कल्याण अधिकारी विश्वनाथ गौतम ने पेश की मिसाल

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नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने काम और समय को सबसे ऊपर रखते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए इंसानियत और संवेदनशीलता हर जिम्मेदारी से बड़ी होती है। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है समाज कल्याण अधिकारी विश्वनाथ गौतम ने, जिनकी संवेदनशीलता और मानवीय सोच ने एक बेजुबान की जान बचा ली।

विश्वनाथ गौतम ने अपने फेसबुक पोस्ट में साझा कर बताया कि बीते रोज वह भीमताल से नैनीताल की ओर अपने जरूरी कार्य के लिए जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि सड़क किनारे एक गाय का बछड़ा झाड़ियों में बुरी तरह फंसा हुआ है और गहरी खाई में गिरने की कगार पर है। दो युवक पूरी ताकत से उसकी पूंछ पकड़कर उसे गिरने से बचाने की कोशिश कर रहे थे। जरा सी चूक होती तो बछड़ा सीधे गहरी खाई में समा जाता।

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हालांकि उन्हें अपने काम के लिए देर हो रही थी, लेकिन यह दृश्य देखकर उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी गाड़ी रुकवाई और मदद के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने भी बछड़े को संभाल लिया ताकि वह खाई की ओर न खिसके।

इसी दौरान वहां मौजूद एक साहसी युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना खाई के ढलान पर उतरकर बछड़े के शरीर पर रस्सी बांधी। इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर एकजुट प्रयास किया और आखिरकार बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि पूरी घटना के दौरान बछड़ा शांत रहा और उसे कोई गंभीर चोट भी नहीं आई।

विश्वनाथ गौतम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उस समय वहां मौजूद अधिकांश लोग एक-दूसरे से परिचित भी नहीं थे, लेकिन एक बेजुबान की जान बचाने के लिए सभी बिना किसी स्वार्थ के एक परिवार की तरह जुट गए। उन्होंने विशेष रूप से उस बहादुर युवक का आभार व्यक्त किया, जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर सबसे कठिन जिम्मेदारी निभाई।

उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा कि यदि हम सभी जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद के लिए इसी तरह आगे आते रहें, तो दुनिया सचमुच रहने के लिए एक बेहतर जगह बन जाएगी।

यह घटना सिर्फ एक बछड़े के बचाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह याद दिलाती है कि इंसानियत, करुणा और संवेदनशीलता आज भी समाज में जीवित है।

समाज कल्याण अधिकारी विश्वनाथ गौतम का यह कदम न केवल एक बेजुबान के प्रति दया का उदाहरण है, बल्कि हर व्यक्ति के लिए यह संदेश भी है कि किसी की जान बचाने से बड़ा कोई काम नहीं होता। कभी-कभी कुछ मिनट रुक जाना किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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