पूछता है पतलोट डिग्री कॉलेज: 2027 की तैयारी बाद में, पहले पहाड़ के युवाओं का भविष्य बचाइए!

खबर शेयर करें -

पतलोट (ओखलकांडा), प्रेस 15 न्यूज। पहाड़ का युवा अगर गांव में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देखता है, तो क्या उसके हिस्से में सिर्फ आश्वासन ही आएंगे?

राजकीय महाविद्यालय पतलोट के छात्र-छात्राओं का यही सवाल अब जनप्रतिनिधियों और शासन से जवाब मांग रहा है। कॉलेज की शैक्षणिक और आधारभूत समस्याओं को लेकर छात्र आंदोलन पर उतरे, उनकी मांगें सुनी गईं, समाधान का भरोसा मिला और आश्वासन के बाद आंदोलन भी समाप्त कर दिया गया।

Ad

लेकिन इसके बाद भी जब शासन स्तर से कोई स्पष्ट आदेश या आधिकारिक सूचना कॉलेज तक नहीं पहुंची, तो छात्रों के बीच यह सवाल फिर गूंजने लगा है कि आखिर कब तक पहाड़ के युवाओं को आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जाती रहेगी?

बताते चलें कि राजकीय महाविद्यालय पतलोट की समस्याओं को लेकर छात्र-छात्राओं ने पूर्व में धरना-प्रदर्शन किया था। आंदोलन के बाद छात्रों की बैठक हुई और उनकी ओर से भीमताल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ संपर्क कर समस्याओं के समाधान की मांग रखी गई।

छात्रों के मुताबिक, वर्तमान क्षेत्रीय विधायक और मंत्री राम सिंह कैड़ा की ओर से उनकी मांगों को शासन स्तर तक ले जाने और समाधान का आश्वासन दिया गया। इसी भरोसे पर छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

इसके बाद विधायक की ओर से देहरादून जाकर संबंधित स्तर पर छात्रों की मांगें रखने की जानकारी भी सामने आई। प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में भी जल्द मांगें पूरी किए जाने और कॉलेज की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिए जाने की बात कही गई। मगर अब तक कॉलेज को शासन स्तर से कोई स्पष्ट आदेश, शासनादेश या आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। यही स्थिति छात्रों की चिंता बढ़ा रही है।

पूर्व छात्रसंघ छात्रा उपाध्यक्ष लीला पोखरिया का कहना है कि छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई और जनप्रतिनिधि के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त किया था।

उम्मीद थी कि शासन स्तर पर जल्द कार्रवाई होगी, लेकिन समय बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यह किसी एक छात्र की समस्या नहीं, बल्कि महाविद्यालय में पढ़ रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है।

आखिर कब तक आश्वासनों के सहारे चलेगा पहाड़ का युवा? यह सवाल सिर्फ पतलोट के एक डिग्री कॉलेज का नहीं है। यह उन तमाम पहाड़ी परिवारों का सवाल है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य बेहतर बनाने का सपना देखते हैं।

पहाड़ का किसान अपने बेटे-बेटी को पढ़ाने के लिए अपनी मेहनत की कमाई लगाता है। कई परिवारों के लिए अपने बच्चों को भीमताल, हल्द्वानी, देहरादून के महंगे निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाना आसान नहीं है।

ऐसे में गांव और कस्बों में मौजूद सरकारी महाविद्यालय ही उनके बच्चों के सपनों का सबसे बड़ा सहारा हैं। अगर इन्हीं संस्थानों की शैक्षणिक और आधारभूत जरूरतें वर्षों तक फाइलों और आश्वासनों में उलझी रहेंगी, तो आखिर गरीब और मध्यमवर्गीय पहाड़ी परिवार अपने बच्चों के भविष्य का सपना कहां पूरा करेंगे?

नेतागिरी खूब कीजिए, लेकिन युवाओं के भविष्य को तो बख्श दीजिए!

भीमताल विधानसभा के पहाड़ी क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों से अब यह सवाल पूछना जरूरी हो गया है कि आखिर डिग्री कॉलेज में छात्र हितों से जुड़ी मांगों को कब तक लटकाए रखा जाएगा?

नेतागिरी करनी है, खूब कीजिए। राजनीति करनी है, खूब कीजिए। 2027 चुनाव की तैयारियां करनी हैं, वह भी कीजिए। लेकिन उच्च शिक्षा के जरिए अपने जीवन को बेहतर बनाने का सपना देख रहे पहाड़ के युवक-युवतियों को तो कम से कम बख्श दीजिए।

आखिर कब तक पहाड़ के युवाओं को आश्वासन की घुट्टी पिलाई जाएगी?

आखिर कब तक उनकी शिक्षा से जुड़े सवाल राजनीतिक प्राथमिकताओं के पीछे दबे रहेंगे?
और आखिर कब तक पतलोट डिग्री कॉलेज की मांगें आदेश और फाइलों के बीच झूलती रहेंगी?

क्या जनप्रतिनिधि यह सोच रहे हैं कि पतलोट और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के सभी युवा अपने गांव-कस्बे का सरकारी कॉलेज छोड़कर भीमताल या दूसरे शहरों में मौजूद महंगे निजी विश्वविद्यालयों में दाखिला ले लें?

अगर ऐसा है तो सवाल यह भी है कि क्या पहाड़ के किसानों और सामान्य परिवारों को इतना आर्थिक रूप से मजबूत कर दिया गया है कि वे अपने बच्चों की महंगी निजी शिक्षा का खर्च उठा सकें? अगर जवाब ना है, तो फिर राजनीतिक प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने की जरूरत है।

2027 की राजनीति से पहले 2026 के युवाओं का भविष्य देखिए

विधानसभा चुनाव की राजनीति अपनी जगह है और जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपनी जगह। लेकिन पतलोट के छात्र-छात्राओं का भविष्य किसी चुनावी कैलेंडर का इंतजार नहीं कर सकता।

2027 में कौन विधायक बनेगा, यह जनता तय करेगी। लेकिन 2026 में पहाड़ के कितने युवाओं का भविष्य बेहतर होगा, यह आज लिए जाने वाले फैसले तय करेंगे।

इसलिए वर्तमान मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा समेत भीमताल क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर पतलोट डिग्री कॉलेज की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।

छात्रों को फिर आंदोलन की राह पर जाने के लिए मजबूर करने के बजाय उनके सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए और शासन स्तर पर हुई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

क्योंकि पहाड़ का युवा कोई एहसान नहीं मांग रहा। वह अपने अधिकार की शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और उज्ज्वल भविष्य का अवसर मांग रहा है। और इस सवाल का जवाब अब आश्वासन से नहीं, आदेश और कार्रवाई से देना होगा।

What’s your Reaction?
+1
3
+1
1
+1
0
+1
0
+1
0

Ad

संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

सम्बंधित खबरें