उत्तराखंड में बिल्डिंग बायलाॅज में होगा बड़ा संशोधन, भूकंपरोधी निर्माण को मिलेगी नई दिशा

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देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और व्यवहारिक बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। उत्तराखण्ड के पूरे क्षेत्र के भूकंप जोन छह में शामिल होने और भारतीय मानक ISO 1893-2025 लागू होने के बाद अब राज्य के बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा और संशोधन के लिए 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि यूएलएमएमसी, देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को समिति का संयोजक बनाया गया है।

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गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखण्ड में लागू बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित हैं, जिन्हें अब नवीन भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप अपडेट किया जाएगा।

विशेषज्ञों का व्यापक प्रतिनिधित्व

समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी रुड़की, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विभिन्न विकास प्राधिकरणों और भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति वास्तुविदों और विभिन्न अभियंताओं के साथ विचार-विमर्श कर राज्य के लिए अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक बायलाॅज तैयार करेगी।

सरकार का स्पष्ट संदेश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण नियमों में बदलाव आवश्यक हो गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य बायलाॅज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाना है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिल सके और आपदा जोखिम में कमी आए।

वहीं सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियमों में संशोधन नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। उन्होंने बताया कि संशोधित बायलाॅज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड, संरचनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।

सुरक्षित और टिकाऊ विकास की ओर कदम

नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदा के समय जन-धन की हानि में कमी आएगी और सुरक्षित व टिकाऊ शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी। समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी, जिसके आधार पर बायलाॅज में आवश्यक संशोधन और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

समिति का कार्यक्षेत्र

समिति उत्तराखण्ड के मौजूदा बिल्डिंग बायलाॅज की विस्तृत समीक्षा करेगी, भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संशोधित मसौदा तैयार करेगी, भूकंप-रोधी डिजाइन व नई निर्माण तकनीकों को शामिल करेगी, पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक ढंग से समाहित करेगी, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए प्रावधान सुझाएगी तथा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशिक्षण से जुड़े सुझाव देगी।

राज्य सरकार का यह कदम उत्तराखण्ड को आपदा-सुरक्षित, संरचनात्मक रूप से मजबूत और सतत विकास की दिशा में आगे ले जाने वाला माना जा रहा है।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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