Uttarakhand: मानवता को झटका, मददगार डॉ. बृजेश बने सिस्टम का निशाना, उठे सवाल

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कपकोट (बागेश्वर), प्रेस 15 न्यूज। यह खबर सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता और संवेदना पर उठते बड़े सवालों की कहानी है।

जहां एक ओर आपात स्थिति में मानवता दिखाते हुए एक चिकित्सक ने अपनी जेब से एंबुलेंस में डीजल भरवाकर घायलों की जान बचाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर उसी डॉक्टर को पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। यह निर्णय पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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यह मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कपकोट का है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने हर किसी को झकझोर दिया है।

20 अप्रैल को क्षेत्र में लाथी के पास हुए एक वाहन हादसे में 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया जाना था। सीएचसी में दो एंबुलेंस मौजूद थीं, लेकिन बजट के अभाव में उनमें डीजल नहीं था।

ऐसे कठिन समय में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बृजेश घटियाल ने मानवीय संवेदना को प्राथमिकता देते हुए अपने निजी खर्च से एंबुलेंस में डीजल भरवाया और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल भिजवाया। जिस वक्त सिस्टम खामोश था, उस वक्त एक डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया।

लेकिन इसी मानवीय पहल का परिणाम ऐसा निकला, जिसने पूरे मामले को विवादों में डाल दिया। विभाग ने अस्पताल की अन्य अव्यवस्थाओं के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया।

इस संबंध में सीएमओ बागेश्वर डॉ. कुमार आदित्य तिवारी की ओर से कहा गया है कि प्रभारी चिकित्साधिकारी की कार्यशैली में कोई कमी नहीं थी लेकिन स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखना उनका दायित्व है। एंबुलेंस में तेल न होने और अस्पताल की सफाई व्यवस्था पटरी से उतरने की शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं जिसे प्रथम दृष्टया उनकी लापरवाही माना गया है। इसी क्रम में उनका कार्यभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं।

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रहा, बल्कि एक गहरे सवाल में बदल गया है। क्या सिस्टम में जिम्मेदारी निभाने से ज्यादा सजा मिलती है? क्या मानवीयता दिखाना अब गुनाह बनता जा रहा है?

जिस डॉक्टर ने संकट की घड़ी में अपनी जेब खोलकर मरीजों की जान बचाई, उसे ही पद से हटाने का आदेश कई लोगों के लिए हैरानी और आक्रोश का विषय बना हुआ है। यह घटना व्यवस्था को आईना दिखाती है और एक चेतावनी भी कि अगर संवेदनशीलता को दंडित किया जाएगा, तो फिर सेवा की भावना कैसे जिंदा रहेगी?

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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