
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। माता-पिता और परिवार जब किसी अपने को नशे की दलदल से निकालने के लिए नशामुक्ति केंद्रों का सहारा लेते हैं, तो उनके मन में उम्मीद होती है कि वहां इलाज, देखभाल और एक नई जिंदगी मिलेगी।
लेकिन हकीकत कई बार इससे उलट निकलती है। समय-समय पर जब भी प्रशासनिक टीमें इन केंद्रों का निरीक्षण करती हैं, तो वहां की व्यवस्थाओं की पोल खुलती ही रहती है।
हल्द्वानी में आज भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां दो नशामुक्ति केंद्रों की जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इलाज के नाम पर परिजनों से मोटी रकम वसूली जा रही है, जबकि बुनियादी मानक और नियमों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है।
जिलाधिकारी नैनीताल के निर्देशों के क्रम में 23 मई 2026 को मानस नशामुक्ति केंद्र, लामाचौड़ एवं प्रकाश नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, प्रेमपुर लोशज्ञानी का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दोनों केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे नशा मुक्ति के नाम पर चल रहे इन संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मानस नशामुक्ति केंद्र, लामाचौड़ में निरीक्षण के समय 56 मरीज भर्ती पाए गए। जांच के दौरान परिसर में एक्सपायरी डेट की दवाइयां पाई गईं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही हैं।
इसके अलावा, यह भी पाया गया कि केंद्र में बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय डिग्री या वैधानिक अनुमति के होम्योपैथी एवं इलेक्ट्रोपैथी दवाओं का उपयोग मरीजों के उपचार में किया जा रहा था। यह स्थिति प्रथम दृष्टया चिकित्सा मानकों और नियमों के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
वहीं प्रकाश नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, हल्द्वानी में 27 मरीज भर्ती पाए गए। निरीक्षण में पाया गया कि केंद्र में मरीजों के लिए पर्याप्त प्रकाश और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था नहीं थी। आवासीय कक्षों में प्राकृतिक हवा और रोशनी का अभाव पाया गया, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई। प्रशासन ने केंद्र प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, मानस नशामुक्ति केंद्र के मामले में विस्तृत रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नैनीताल को अग्रिम आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जा रही है।
निरीक्षण के दौरान सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पारूल थपलियाल, उपजिलाधिकारी हल्द्वानी प्रमोद कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्वेता भंडारी, सहायक समाज कल्याण अधिकारी राहुल आर्य सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी और सख्त मानकों का पालन कितना जरूरी है, ताकि मरीजों की जिंदगी के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ न हो सके।









